स प्रियोरुयुगकञ्चुकांशुके
न्यस्य दृष्टिमथ सिष्मिये नृपः ।
आववार तदथाम्बराञ्चलैः
सा निरावृतिरिव त्रपावृता ॥
स प्रियोरुयुगकञ्चुकांशुके
न्यस्य दृष्टिमथ सिष्मिये नृपः ।
आववार तदथाम्बराञ्चलैः
सा निरावृतिरिव त्रपावृता ॥
न्यस्य दृष्टिमथ सिष्मिये नृपः ।
आववार तदथाम्बराञ्चलैः
सा निरावृतिरिव त्रपावृता ॥
अन्वयः
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अथ सः नृपः प्रिय-उरु-युग-कञ्चुक-अंशुके दृष्टिम् न्यस्य सिष्मिये । अथ सा त्रपा-वृता निः-आवृतिः इव तत् अम्बर-अञ्चलैः आववार ।
Summary
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Then the king, casting his gaze upon the garment covering his beloved's thighs, smiled. Covered with shame, she, as if she were completely uncovered, then covered that area with the hems of her clothes.
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | he |
| प्रियोरुयुगकञ्चुकांशुके | प्रिय–उरुयुग–कञ्चुक–अंशुक (७.१) | on the garment covering the beloved's pair of thighs |
| न्यस्य | न्यस्य (नि√अस्+ल्यप्) | having placed |
| दृष्टिम् | दृष्टि (२.१) | his gaze |
| अथ | अथ | then |
| सिष्मिये | सिष्मिये (√स्मि कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he smiled |
| नृपः | नृप (१.१) | the king |
| आववार | आववार (आ√वृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | she covered |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| अथ | अथ | then |
| अम्बराञ्चलैः | अम्बर–अञ्चल (३.३) | with the hems of her garment |
| सा | तद् (१.१) | she |
| निरावृतिरिव | निस्–आवृति (१.१)–इव | as if uncovered |
| त्रपावृता | त्रपा–वृत (१.१) | covered with shame |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | प्रि | यो | रु | यु | ग | क | ञ्चु | कां | शु | के |
| न्य | स्य | दृ | ष्टि | म | थ | सि | ष्मि | ये | नृ | पः |
| आ | व | वा | र | त | द | था | म्ब | रा | ञ्च | लैः |
| सा | नि | रा | वृ | ति | रि | व | त्र | पा | वृ | ता |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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