यत्त्वयास्मि सदसि स्रजाञ्चित-
स्तन्मयापि भवदर्हणार्हति ।
इत्युदीर्य निजहारमर्पय-
न्नस्पृशत्स तदुरोजकोरकौ ॥
यत्त्वयास्मि सदसि स्रजाञ्चित-
स्तन्मयापि भवदर्हणार्हति ।
इत्युदीर्य निजहारमर्पय-
न्नस्पृशत्स तदुरोजकोरकौ ॥
स्तन्मयापि भवदर्हणार्हति ।
इत्युदीर्य निजहारमर्पय-
न्नस्पृशत्स तदुरोजकोरकौ ॥
अन्वयः
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'यत् सदसि त्वया स्रजा अञ्चितः अस्मि, तत् मया अपि भवत्-अर्हणा अर्हति' इति उदीर्य, निज-हारम् अर्पयन् सः तदुरोज-कोरकौ अस्पृशत् ।
Summary
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Saying, "Since you honored me with a garland in the assembly, you also deserve to be worshipped by me," he, while offering his own necklace, touched her two breast-buds.
पदच्छेदः
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| यत् | यत् | since |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| सदसि | सदस् (७.१) | in the assembly |
| स्रजा | स्रज् (३.१) | with a garland |
| अञ्चितः | अञ्चित (√अञ्च्+क्त, १.१) | honored |
| तत् | तत् | therefore |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| अपि | अपि | also |
| भवदर्हणार्हति | भवत्–अर्हणा (१.१)–अर्हति (√अर्ह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | your worship is deserved |
| इति | इति | thus |
| उदीर्य | उदीर्य (उद्√ईर्+ल्यप्) | having said |
| निजहारम् | निज–हार (२.१) | his own necklace |
| अर्पयन् | अर्पयत् (√ऋ+णिच्+शतृ, १.१) | offering |
| अस्पृशत् | अस्पृशत् (√स्पृश् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he touched |
| सः | तद् (१.१) | he |
| तदुरोजकोरकौ | तद्–उरोज–कोरक (२.२) | her two breast-buds |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | त्त्व | या | स्मि | स | द | सि | स्र | जा | ञ्चि | त |
| स्त | न्म | या | पि | भ | व | द | र्ह | णा | र्ह | ति |
| इ | त्यु | दी | र्य | नि | ज | हा | र | म | र्प | य |
| न्न | स्पृ | श | त्स | त | दु | रो | ज | को | र | कौ |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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