पार्श्वमागमि निजं सहालिभि-
स्तेन पूर्वमथ सा तयैकया ।
क्वापि तामपि नियुज्य मायिना
स्वात्ममात्रसचिवावशेषिता ॥
पार्श्वमागमि निजं सहालिभि-
स्तेन पूर्वमथ सा तयैकया ।
क्वापि तामपि नियुज्य मायिना
स्वात्ममात्रसचिवावशेषिता ॥
स्तेन पूर्वमथ सा तयैकया ।
क्वापि तामपि नियुज्य मायिना
स्वात्ममात्रसचिवावशेषिता ॥
अन्वयः
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अथ सा पूर्वम् आलिभिः सह निजम् पार्श्वम् आगमि । अथ मायिना तेन, तया एकया (सह स्थितायाः तस्याः) ताम् अपि क्व अपि नियुज्य, सा स्व-आत्म-मात्र-सचिव-अवशेषिता ।
Summary
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First, she came to his side with her friends. Then, the cunning Nala, after sending away even the single friend who remained with her, caused her to be left with only herself as her companion.
पदच्छेदः
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| पार्श्वम् | पार्श्व (२.१) | side |
| आगमि | आगमि (आ√गम् कर्तरि लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she came |
| निजम् | निज (२.१) | his own |
| सहालिभिः | सह–आलि (३.३) | with her friends |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| पूर्वम् | पूर्वम् | first |
| अथ | अथ | then |
| सा | तद् (१.१) | she |
| तयैकया | तद् (३.१)–एक (३.१) | with that one (friend) |
| क्वापि | क्व–अपि | somewhere |
| ताम् | तद् (२.१) | her (the friend) |
| अपि | अपि | also |
| नियुज्य | नियुज्य (नि√युज्+ल्यप्) | having sent away |
| मायिना | मायिन् (३.१) | by the cunning one (Nala) |
| स्वात्ममात्रसचिवावशेषिता | स्व–आत्मन्–मात्र–सचिव–अवशेषित (अव√शिष्+णिच्+क्त, १.१) | was left with only herself as a companion |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पा | र्श्व | मा | ग | मि | नि | जं | स | हा | लि | भि |
| स्ते | न | पू | र्व | म | थ | सा | त | यै | क | या |
| क्वा | पि | ता | म | पि | नि | यु | ज्य | मा | यि | ना |
| स्वा | त्म | मा | त्र | स | चि | वा | व | शे | षि | ता |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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