तद्यातायातरंहच्छलकलितरतश्रान्तिनिश्वासधारा-
जस्रव्यामिश्रभावस्फुटकथितमिथःप्राणभेदव्युदासम् ।
बालावक्षोजपत्राङ्कुरकरिमकरीं मुद्रितोर्वीन्द्रवक्ष-
श्चिह्नाख्यातैकभावोभयहृदयमयाद्द्वन्द्वमानन्दनिद्राम् ॥
तद्यातायातरंहच्छलकलितरतश्रान्तिनिश्वासधारा-
जस्रव्यामिश्रभावस्फुटकथितमिथःप्राणभेदव्युदासम् ।
बालावक्षोजपत्राङ्कुरकरिमकरीं मुद्रितोर्वीन्द्रवक्ष-
श्चिह्नाख्यातैकभावोभयहृदयमयाद्द्वन्द्वमानन्दनिद्राम् ॥
जस्रव्यामिश्रभावस्फुटकथितमिथःप्राणभेदव्युदासम् ।
बालावक्षोजपत्राङ्कुरकरिमकरीं मुद्रितोर्वीन्द्रवक्ष-
श्चिह्नाख्यातैकभावोभयहृदयमयाद्द्वन्द्वमानन्दनिद्राम् ॥
अन्वयः
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तत् द्वन्द्वम् यात-अयात-रंहः-छल-कलित-रत-श्रान्ति-निश्वास-धारा-जस्र-व्यामिश्र-भाव-स्फुट-कथित-मिथः-प्राण-भेद-व्युदासम्, बाला-वक्षोज-पत्र-अङ्कुर-करि-मकरीम् मुद्रित-उर्वीन्द्र-वक्षः-चिह्न-आख्यात-एक-भाव-उभय-हृदयम् (यथा तथा) आनन्द-निद्राम् अयात् ।
Summary
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That couple attained a blissful sleep. The constant mingling of their sighs, caused by the fatigue of their love-play, clearly indicated the oneness of their life-breaths. The decorative paintings from her breasts, imprinted on the king's chest, declared the union of their two hearts into one.
पदच्छेदः
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| तत् | तद् (१.१) | that |
| यातायातरंहच्छलकलितरतश्रान्तिनिश्वासधाराजस्रव्यामिश्रभावस्फुटकथितमिथःप्राणभेदव्युदासम् | यात–अयात–रंहस्–छल–कलित–रत–श्रान्ति–निश्वास–धारा–अजस्र–व्यामिश्र–भाव–स्फुट–कथित–मिथः–प्राण–भेद–व्युदास (२.१) | in a way that clearly indicated the removal of any difference between their life-breaths, due to the constant mingling of their sighs of fatigue |
| बालावक्षोजपत्राङ्कुरकरिमकरीम् | बाला–वक्षोज–पत्र–अङ्कुर–करि–मकरी (२.१) | the elephant and crocodile motif decorations on the young woman's breasts |
| मुद्रितोर्वीन्द्रवक्षश्चिह्नाख्यातैकभावोभयहृदयम् | मुद्रित–उर्वीन्द्र–वक्षस्–चिह्न–आख्यात–एक–भाव–उभय–हृदय (२.१) | in a way that the hearts of both declared their oneness through the imprinted mark |
| अयात् | अयात् (√या कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | obtained |
| द्वन्द्वम् | द्वन्द्व (१.१) | the couple |
| आनन्दनिद्राम् | आनन्द–निद्रा (२.१) | blissful sleep |
छन्दः
स्रग्धरा [२१: मरभनययय]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ | २० | २१ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द्या | ता | या | त | रं | ह | च्छ | ल | क | लि | त | र | त | श्रा | न्ति | नि | श्वा | स | धा | रा |
| ज | स्र | व्या | मि | श्र | भा | व | स्फु | ट | क | थि | त | मि | थः | प्रा | ण | भे | द | व्यु | दा | सम् |
| बा | ला | व | क्षो | ज | प | त्रा | ङ्कु | र | क | रि | म | क | रीं | मु | द्रि | तो | र्वी | न्द्र | व | क्ष |
| श्चि | ह्ना | ख्या | तै | क | भा | वो | भ | य | हृ | द | य | म | या | द्द्व | न्द्व | मा | न | न्द | नि | द्राम् |
| म | र | भ | न | य | य | य | ||||||||||||||
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