अन्वयः
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मदीय-विरहात् निजाम् भीतिम् ईरितवती त्वम् मया रहः श्रुता । 'तत् भवतीम् न उज्झिता अस्मि' इति अयम् असत्य-कातरः वरम् व्याहरत् ।
Summary
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"I secretly heard you express your own fear of separation from me. Therefore, this truthful one (Nala) uttered this boon: 'I have not abandoned you.'"
पदच्छेदः
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| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| मदीयविरहात् | मदीय–विरह (५.१) | from separation from me |
| मया | अस्मद् (३.१) | by me |
| निजाम् | निज (२.१) | your own |
| भीतिम् | भीति (२.१) | fear |
| ईरितवती | ईरितवती (√ईर्+क्तवतु, १.१) | you who expressed |
| रहः | रहस् | in secret |
| श्रुता | श्रुत (√श्रु+क्त, १.१) | heard |
| न | न | not |
| उज्झिता | उज्झित (√उझ्झ्+क्त, १.१) | abandoned |
| अस्मि | अस्मि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I am |
| भवतीम् | भवत् (२.१) | you |
| तत् | तद् | therefore |
| इति | इति | thus |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| व्याहरत् | व्याहरत् (वि+आ√हृ कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| वरम् | वर (२.१) | boon |
| असत्यकातरः | असत्य–कातर (१.१) | one who is afraid of falsehood |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्वं | म | दी | य | वि | र | हा | न्म | या | नि | जां |
| भी | ति | मी | रि | त | व | ती | र | हः | श्रु | ता |
| नो | ज्झि | ता | स्मि | भ | व | तीं | त | दि | त्य | यं |
| व्या | ह | र | द्व | र | म | स | त्य | का | त | रः |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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