छुप्तपत्रविनिमीलितात्क्षुपा-
त्कच्छपस्य धृतचापलात्पलात् ।
त्वत्सखीषु सरटाच्छिरोधुतः
स्वं भियोऽभिदधतीषु वैभवम् ॥
छुप्तपत्रविनिमीलितात्क्षुपा-
त्कच्छपस्य धृतचापलात्पलात् ।
त्वत्सखीषु सरटाच्छिरोधुतः
स्वं भियोऽभिदधतीषु वैभवम् ॥
त्कच्छपस्य धृतचापलात्पलात् ।
त्वत्सखीषु सरटाच्छिरोधुतः
स्वं भियोऽभिदधतीषु वैभवम् ॥
अन्वयः
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छुप्त-पत्र-विनिमीलितात् क्षुपात्, धृत-चापलात् कच्छपस्य पलात्, सरटात् शिरः-धुतः (च) त्वत्-सखीषु भियः स्वम् वैभवम् अभिदधतीषु (सतीषु, त्वम् वीक्षिता असि) ।
Summary
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"I saw you when your friends were expressing the extent of their fear—from a bush hidden by dense leaves, from the sudden movement of a restless tortoise, and from the head-shaking of a lizard."
पदच्छेदः
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| छुप्तपत्रविनिमीलितात् | छुप्त–पत्र–विनिमीलित (वि+नि√मील्+क्त, ५.१) | from the one hidden by dense leaves |
| क्षुपात् | क्षुप (५.१) | from a bush |
| कच्छपस्य | कच्छप (६.१) | of a tortoise |
| धृतचापलात् | धृत (√धृ+क्त)–चापल (५.१) | from the one showing fickleness |
| पलात् | पल (५.१) | from the sudden movement |
| त्वत्सखीषु | त्वत्–सखी (७.३) | among your friends |
| सरटात् | सरट (५.१) | from a lizard |
| शिरोधुतः | शिरस्–धुत (५.१) | from the shaking of the head |
| स्वम् | स्व (२.१) | their own |
| भियः | भी (६.१) | of fear |
| अभिदधतीषु | अभिदधती (अभि√धा+शतृ, ७.३) | while they were expressing |
| वैभवम् | वैभव (२.१) | extent |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छु | प्त | प | त्र | वि | नि | मी | लि | ता | त्क्षु | पा |
| त्क | च्छ | प | स्य | धृ | त | चा | प | ला | त्प | लात् |
| त्व | त्स | खी | षु | स | र | टा | च्छि | रो | धु | तः |
| स्वं | भि | यो | ऽभि | द | ध | ती | षु | वै | भ | वम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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