शर्म किं हृदि हरेः प्रियार्पणं
किं शिवार्धघटने शिवस्य वा ।
कामये तव महेषु तन्वि तं
नन्वयं सरिदुदन्वदन्वयम् ॥
शर्म किं हृदि हरेः प्रियार्पणं
किं शिवार्धघटने शिवस्य वा ।
कामये तव महेषु तन्वि तं
नन्वयं सरिदुदन्वदन्वयम् ॥
किं शिवार्धघटने शिवस्य वा ।
कामये तव महेषु तन्वि तं
नन्वयं सरिदुदन्वदन्वयम् ॥
अन्वयः
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तन्वि, हरेः हृदि प्रिय-अर्पणम् किम् शर्म? वा शिवस्य शिव-अर्ध-घटने किम् (शर्म)? तव महेषु तम् (आनन्दम्) कामये । ननु अयम् सरित्-उदन्वत्-अन्वयम् (अस्ति) ।
Summary
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"O slender one, what is Vishnu's happiness in having Lakshmi on his chest, or Shiva's in uniting with Parvati as half his body? I desire that joy found in your festivals (of love). Indeed, this is like a river (my love) flowing into the ocean (your love)."
पदच्छेदः
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| शर्म | शर्मन् (१.१) | happiness |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| हृदि | हृद् (७.१) | in the heart |
| हरेः | हरि (६.१) | of Hari |
| प्रियार्पणम् | प्रिया–अर्पण (१.१) | the offering of his beloved |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| शिवार्धघटने | शिव–अर्ध–घटन (७.१) | in the union with half of Shiva's body |
| शिवस्य | शिव (६.१) | of Shiva |
| वा | वा | or |
| कामये | कामये (√कम् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I desire |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| महेषु | मह (७.३) | in the festivals |
| तन्वि | तन्वी (८.१) | O slender one |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| ननु | ननु | indeed |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| सरिदुदन्वदन्वयम् | सरित्–उदन्वत्–अन्वय (२.१) | the sequence of a river and the ocean |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श | र्म | किं | हृ | दि | ह | रेः | प्रि | या | र्प | णं |
| किं | शि | वा | र्ध | घ | ट | ने | शि | व | स्य | वा |
| का | म | ये | त | व | म | हे | षु | त | न्वि | तं |
| न | न्व | यं | स | रि | दु | द | न्व | द | न्व | यम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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