स क्षाणः सुमुखि यत्त्वदीक्षणं
तच्चराज्यमुरु येन रज्यसि ।
तन्नलस्य सुधयाभिषेचनं
यत्त्वदङ्गपरिरम्भविभ्रमः ॥
स क्षाणः सुमुखि यत्त्वदीक्षणं
तच्चराज्यमुरु येन रज्यसि ।
तन्नलस्य सुधयाभिषेचनं
यत्त्वदङ्गपरिरम्भविभ्रमः ॥
तच्चराज्यमुरु येन रज्यसि ।
तन्नलस्य सुधयाभिषेचनं
यत्त्वदङ्गपरिरम्भविभ्रमः ॥
अन्वयः
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सुमुखि, यत् त्वत्-ईक्षणम् सः क्षणः (अस्ति) । येन (त्वम्) रज्यसि, तत् च उरु राज्यम् (अस्ति) । यत् त्वत्-अङ्ग-परिरम्भ-विभ्रमः, तत् नलस्य सुधया अभिषेचनम् (अस्ति) ।
Summary
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"O beautiful-faced one, your glance is a festival. That by which you are pleased is a great kingdom. And the delightful play of embracing your body is, for Nala, an anointment with nectar."
पदच्छेदः
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| सः | तद् (१.१) | that |
| क्षणः | क्षण (१.१) | a festival |
| सुमुखि | सुमुखी (८.१) | O beautiful-faced one |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| त्वदीक्षणम् | त्वत्–ईक्षण (१.१) | your glance |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| च | च | and |
| राज्यम् | राज्य (१.१) | kingdom |
| उरु | उरु (१.१) | great |
| येन | यद् (३.१) | by which |
| रज्यसि | रज्यसि (√रञ्ज् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you are pleased |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| नलस्य | नल (६.१) | for Nala |
| सुधया | सुधा (३.१) | with nectar |
| अभिषेचनम् | अभिषेचन (१.१) | anointment |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| त्वदङ्गपरिरम्भविभ्रमः | त्वत्–अङ्ग–परिरम्भ–विभ्रम (१.१) | the delightful play of embracing your body |
छन्दः
उपजातिः [११]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | क्षा | णः | सु | मु | खि | य | त्त्व | दी | क्ष | णं |
| त | च्च | रा | ज्य | मु | रु | ये | न | र | ज्य | सि |
| त | न्न | ल | स्य | सु | ध | या | भि | षे | च | नं |
| य | त्त्व | द | ङ्ग | प | रि | र | म्भ | वि | भ्र | मः |
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