इत्थमुक्तिमुपहृत्य कोमलां
तल्पचुम्बिचिकुरश्चकार सः ।
आत्ममौलिमणिकान्तिभङ्गिनीं
तत्पदारुणसरोजसङ्गिनीम् ॥
इत्थमुक्तिमुपहृत्य कोमलां
तल्पचुम्बिचिकुरश्चकार सः ।
आत्ममौलिमणिकान्तिभङ्गिनीं
तत्पदारुणसरोजसङ्गिनीम् ॥
तल्पचुम्बिचिकुरश्चकार सः ।
आत्ममौलिमणिकान्तिभङ्गिनीं
तत्पदारुणसरोजसङ्गिनीम् ॥
अन्वयः
AI
सः इत्थम् कोमलाम् उक्तिम् उपहृत्य, तल्प-चुम्बि-चिकुरः (सन्) आत्म-मौलि-मणि-कान्ति-भङ्गिनीम् तत्-पद-अरुण-सरोज-सङ्गिनीम् (प्रणतिम्) चकार ।
Summary
AI
Having offered this tender speech, he, with his hair touching the bed, performed a prostration that dimmed the lustre of his own crown jewel as it came into contact with her red lotus-like feet.
पदच्छेदः
AI
| इत्थम् | इत्थम् | thus |
| उक्तिम् | उक्ति (२.१) | speech |
| उपहृत्य | उपहृत्य (उप+आ√हृ+ल्यप्) | having offered |
| कोमलाम् | कोमल (२.१) | tender |
| तल्पचुम्बिचिकुरः | तल्प–चुम्बिन्–चिकुर (१.१) | he whose hair touched the bed |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | performed |
| सः | तद् (१.१) | he |
| आत्ममौलिमणिकान्तिभङ्गिनीम् | आत्म–मौलि–मणि–कान्ति–भङ्गिनी (२.१) | which dims the lustre of the jewel on his own crown |
| तत्पदारुणसरोजसङ्गिनीम् | तत्–पद–अरुण–सरोज–सङ्गिनी (२.१) | which is associated with her red lotus-like feet |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्थ | मु | क्ति | मु | प | हृ | त्य | को | म | लां |
| त | ल्प | चु | म्बि | चि | कु | र | श्च | का | र | सः |
| आ | त्म | मौ | लि | म | णि | का | न्ति | भ | ङ्गि | नीं |
| त | त्प | दा | रु | ण | स | रो | ज | स | ङ्गि | नीम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.