रोषरूषितमुखीमिव प्रियां
वीक्ष्य भीतिदरकम्पिताक्षराम् ।
तां जगाद स न वेद्मि तन्वि तं
कश्चकार तव कोपरोपणाम् ॥
रोषरूषितमुखीमिव प्रियां
वीक्ष्य भीतिदरकम्पिताक्षराम् ।
तां जगाद स न वेद्मि तन्वि तं
कश्चकार तव कोपरोपणाम् ॥
वीक्ष्य भीतिदरकम्पिताक्षराम् ।
तां जगाद स न वेद्मि तन्वि तं
कश्चकार तव कोपरोपणाम् ॥
अन्वयः
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रोष-रूषित-मुखीम् इव, भीति-दर-कम्पित-अक्षराम् प्रियाम् वीक्ष्य सः ताम् जगाद - तन्वि, तव कोप-रोपणाम् कः चकार, तम् न वेद्मि ।
Summary
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Seeing his beloved with a face as if colored by anger and words trembling slightly with feigned fear, he said to her, "O slender one, who is it that has planted this anger in you? I do not know him."
पदच्छेदः
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| रोषरूषितमुखीम् | रोष–रूषित–मुखी (२.१) | whose face was colored with anger |
| इव | इव | as if |
| प्रियां | प्रिया (२.१) | the beloved |
| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| भीतिदरकम्पिताक्षराम् | भीति–दर–कम्पित–अक्षरा (२.१) | whose words were trembling slightly with fear |
| तां | तद् (२.१) | to her |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he said |
| सः | तद् (१.१) | he |
| न | न | not |
| वेद्मि | वेद्मि (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | I know |
| तन्वि | तन्वी (८.१) | O slender one! |
| तं | तद् (२.१) | him |
| कः | किम् (१.१) | who |
| चकार | चकार (√कृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | did |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
| कोपरोपणाम् | कोप–रोपणा (२.१) | the planting of anger |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रो | ष | रू | षि | त | मु | खी | मि | व | प्रि | यां |
| वी | क्ष्य | भी | ति | द | र | क | म्पि | ता | क्ष | राम् |
| तां | ज | गा | द | स | न | वे | द्मि | त | न्वि | तं |
| क | श्च | का | र | त | व | को | प | रो | प | णाम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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