वीक्ष्य वीक्ष्य करजस्य विभ्रमं
प्रेयसार्जितमुरोजयोरियम् ।
कान्तमैक्षत हसस्पृशं किय-
त्कोपकुञ्चितविलोचनाञ्चला ॥
वीक्ष्य वीक्ष्य करजस्य विभ्रमं
प्रेयसार्जितमुरोजयोरियम् ।
कान्तमैक्षत हसस्पृशं किय-
त्कोपकुञ्चितविलोचनाञ्चला ॥
प्रेयसार्जितमुरोजयोरियम् ।
कान्तमैक्षत हसस्पृशं किय-
त्कोपकुञ्चितविलोचनाञ्चला ॥
अन्वयः
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इयम् उरोजयोः प्रेयसा अर्जितम् करजस्य विभ्रमम् वीक्ष्य वीक्ष्य, कियत् कोप-कुञ्चित-विलोचन-अञ्चला सती कान्तम् हस-स्पृशम् ऐक्षत ।
Summary
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Looking again and again at the nail marks made by her beloved on her breasts, she glanced at him with a slight smile, the corners of her eyes contracted in a show of mock anger.
पदच्छेदः
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| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | looking |
| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | and looking |
| करजस्य | करज (६.१) | of the nail |
| विभ्रमं | विभ्रम (२.१) | the mark, the play |
| प्रेयसा | प्रेयस् (३.१) | by the beloved |
| अर्जितम् | अर्जित (√अर्ज्+क्त, २.१) | acquired, made |
| उरोजयोः | उरोज (७.२) | on the two breasts |
| इयम् | इदम् (१.१) | she |
| कान्तम् | कान्त (२.१) | the beloved |
| ऐक्षत | ऐक्षत (√ईक्ष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | she looked at |
| हसस्पृशं | हस–स्पृश् (२.१) | touching a smile, with a slight smile |
| कियत् | कियत् | somewhat |
| कोपकुञ्चितविलोचनाञ्चला | कोप–कुञ्चित–विलोचन–अञ्चला (१.१) | the corners of whose eyes were contracted with mock anger |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वी | क्ष्य | वी | क्ष्य | क | र | ज | स्य | वि | भ्र | मं |
| प्रे | य | सा | र्जि | त | मु | रो | ज | यो | रि | यम् |
| का | न्त | मै | क्ष | त | ह | स | स्पृ | शं | कि | य |
| त्को | प | कु | ञ्चि | त | वि | लो | च | ना | ञ्च | ला |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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