वीक्ष्य भावमधिगन्तुमुत्सुकां
पूर्वमच्छमणिकुट्टिमे मृदुम् ।
कोऽयमित्युदितसंभ्रमीकृतां
स्वानुबिम्बमददर्शतैष ताम् ॥
वीक्ष्य भावमधिगन्तुमुत्सुकां
पूर्वमच्छमणिकुट्टिमे मृदुम् ।
कोऽयमित्युदितसंभ्रमीकृतां
स्वानुबिम्बमददर्शतैष ताम् ॥
पूर्वमच्छमणिकुट्टिमे मृदुम् ।
कोऽयमित्युदितसंभ्रमीकृतां
स्वानुबिम्बमददर्शतैष ताम् ॥
अन्वयः
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पूर्वम् अच्छ-मणि-कुट्टिमे मृदुम् स्व-अनुबिम्बम् वीक्ष्य भावम् अधिगन्तुम् उत्सुकाम्, 'कः अयम्' इति उदित-संभ्रमी-कृताम् ताम् एषः अददर्शत् ।
Summary
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He (Nala) showed her, her own reflection. At first, upon seeing her reflection gently on the crystal pavement, she was eager to understand its identity, and then became flustered, exclaiming, "Who is this?"
पदच्छेदः
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| वीक्ष्य | वीक्ष्य (वि√ईक्ष्+ल्यप्) | having seen |
| भावम् | भाव (२.१) | the identity |
| अधिगन्तुम् | अधिगन्तुम् (अधि√गम्+तुमुन्) | to understand |
| उत्सुकाम् | उत्सुका (२.१) | eager |
| पूर्वम् | पूर्वम् | at first |
| अच्छ-मणि-कुट्टिमे | अच्छ–मणि–कुट्टिम (७.१) | on the crystal-gem pavement |
| मृदुम् | मृदु (२.१) | gently |
| कः | किम् (१.१) | Who |
| अयम् | इदम् (१.१) | is this |
| इति | इति | thus |
| उदित-संभ्रमी-कृताम् | उदित (√वद्+क्त)–संभ्रमी–कृत (√कृ+क्त, २.१) | she who was made flustered by the utterance |
| स्व-अनुबिम्बम् | स्व–अनुबिम्ब (२.१) | her own reflection |
| अददर्शत् | अददर्शत् (√दृश् +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he showed |
| एषः | एतद् (१.१) | he |
| ताम् | तद् (२.१) | to her |
छन्दः
रथोद्धता [११: रनरलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वी | क्ष्य | भा | व | म | धि | ग | न्तु | मु | त्सु | कां |
| पू | र्व | म | च्छ | म | णि | कु | ट्टि | मे | मृ | दुम् |
| को | ऽय | मि | त्यु | दि | त | सं | भ्र | मी | कृ | तां |
| स्वा | नु | बि | म्ब | म | द | द | र्श | तै | ष | ताम् |
| र | न | र | ल | ग | ||||||
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