समाप्तिलिप्येव भुजिक्रियाविधे-
र्दलोदरं वर्तुलयालयीकृतम् ।
अलंकृतं क्षीरवटैस्तदश्नतां
रराज पाकार्पितगैरिकश्रिया ॥
समाप्तिलिप्येव भुजिक्रियाविधे-
र्दलोदरं वर्तुलयालयीकृतम् ।
अलंकृतं क्षीरवटैस्तदश्नतां
रराज पाकार्पितगैरिकश्रिया ॥
र्दलोदरं वर्तुलयालयीकृतम् ।
अलंकृतं क्षीरवटैस्तदश्नतां
रराज पाकार्पितगैरिकश्रिया ॥
अन्वयः
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भुजि-क्रिया-विधेः समाप्ति-लिप्या इव, वर्तुलया आलयी-कृतम्, क्षीर-वटैः अलंकृतम्, पाक-अर्पित-गैरिक-श्रिया (च युक्तम्) तत् दल-उदरम् अश्नताम् रराज।
Summary
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For the diners, the center of their leaf-plates shone, decorated with milk-vadas. Encircled by a line, it looked like the final mark concluding the ritual of the meal, and it possessed a beauty like red ochre imparted by the cooking process.
पदच्छेदः
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| समाप्तिलिप्या | समाप्ति–लिपि (३.१) | by the script of completion |
| इव | इव | like |
| भुजिक्रियाविधेः | भुजिक्रिया–विधि (६.१) | of the ritual of eating |
| दलोदरं | दल–उदर (१.१) | the interior of the leaf-plate |
| वर्तुलया | वर्तुला (३.१) | by a circle |
| आलयीकृतम् | आलयीकृत (१.१) | encircled |
| अलंकृतं | अलंकृत (अलम्√कृ+क्त, १.१) | decorated |
| क्षीरवटैः | क्षीर–वट (३.३) | with milk-vadas |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अश्नतां | अश्नत् (√अश्+शतृ, ६.३) | of those eating |
| रराज | रराज (√राज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| पाकार्पितगैरिकश्रिया | पाक–अर्पित–गैरिक–श्री (१.१) | possessing the beauty of red ochre imparted by cooking |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मा | प्ति | लि | प्ये | व | भु | जि | क्रि | या | वि | धे |
| र्द | लो | द | रं | व | र्तु | ल | या | ल | यी | कृ | तम् |
| अ | लं | कृ | तं | क्षी | र | व | टै | स्त | द | श्न | तां |
| र | रा | ज | पा | का | र्पि | त | गै | रि | क | श्रि | या |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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