समं ययोरिङ्गितवान्वयस्ययो-
स्तयोर्विहायोपहृतप्रतीङ्गिताम् ।
अकारि नाकूतमवारि सा यया
विदग्धयाऽरञ्जि तयैव भाववित् ॥
समं ययोरिङ्गितवान्वयस्ययो-
स्तयोर्विहायोपहृतप्रतीङ्गिताम् ।
अकारि नाकूतमवारि सा यया
विदग्धयाऽरञ्जि तयैव भाववित् ॥
स्तयोर्विहायोपहृतप्रतीङ्गिताम् ।
अकारि नाकूतमवारि सा यया
विदग्धयाऽरञ्जि तयैव भाववित् ॥
अन्वयः
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भाववित् (युवा) ययोः वयस्ययोः समम् इङ्गितवान्। तयोः उपहृत-प्रतीङ्गिताम् विहाय, (तेन) सा (प्रथमा) न अकारि। भाववित् (सः) तया एव विदग्धया अरञ्जि यया आकूतम् न अवारि।
Summary
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A youth, who understood subtle emotions, gestured equally to two female friends. Ignoring the one who openly returned his gesture, he was pleased only by the other clever maid, who did not reveal his intention.
पदच्छेदः
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| समम् | समम् | equally |
| ययोः | यद् (६.२) | of which two |
| इङ्गितवान् | इङ्गितवत् (१.१) | one who gestured |
| वयस्ययोः | वयस्या (६.२) | of the two female friends |
| तयोः | तद् (६.२) | of those two |
| विहाय | विहाय (वि√हा+ल्यप्) | having left aside |
| उपहृतप्रतीङ्गिताम् | उपहृत–प्रतीङ्गित (२.१) | the one who offered a return gesture |
| अकारि | अकारि (√कृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| न | न | not |
| आकूतम् | आकूत (१.१) | intention |
| अवारि | अवारि (√वृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was revealed/uncovered |
| सा | तद् (१.१) | she |
| यया | यद् (३.१) | by whom |
| विदग्धया | विदग्धा (३.१) | by the clever one |
| अरञ्जि | अरञ्जि (√रञ्ज् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was pleased |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| एव | एव | only |
| भाववित् | भावविद् (१.१) | the knower of feelings |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मं | य | यो | रि | ङ्गि | त | वा | न्व | य | स्य | यो |
| स्त | यो | र्वि | हा | यो | प | हृ | त | प्र | ती | ङ्गि | ताम् |
| अ | का | रि | ना | कू | त | म | वा | रि | सा | य | या |
| वि | द | ग्ध | या | ऽर | ञ्जि | त | यै | व | भा | व | वित् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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