सरोजकोशाभिनयेन पाणिना
स्थितेऽपि कूरे मुहुरेव याचते ।
सखि त्वमस्मै वितर त्वमित्युभे
मिथो न वादाद्ददतुः किलौदनम् ॥
सरोजकोशाभिनयेन पाणिना
स्थितेऽपि कूरे मुहुरेव याचते ।
सखि त्वमस्मै वितर त्वमित्युभे
मिथो न वादाद्ददतुः किलौदनम् ॥
स्थितेऽपि कूरे मुहुरेव याचते ।
सखि त्वमस्मै वितर त्वमित्युभे
मिथो न वादाद्ददतुः किलौदनम् ॥
अन्वयः
AI
कूरे सरोज-कोश-अभिनयेन पाणिना स्थिते अपि, मुहुः एव याचते (सति), "सखि, त्वम् अस्मै वितर", "त्वम् (वितर)" इति मिथः वादात् उभे ओदनम् न ददतुः किल।
Summary
AI
Even as a guest, with his hand shaped like a lotus bud placed on the rice, repeatedly asked for more, two serving maids argued. "Friend, you give it to him," "No, you give it," they said to each other, and due to their dispute, neither of them actually gave him the rice.
पदच्छेदः
AI
| सरोजकोशाभिनयेन | सरोज–कोश–अभिनय (३.१) | with a hand gesturing like a lotus bud |
| पाणिना | पाणि (३.१) | with the hand |
| स्थिते | स्थित (√स्था+क्त, ७.१) | while being placed |
| अपि | अपि | even |
| कूरे | कूर (७.१) | on the boiled rice |
| मुहुः | मुहुस् | repeatedly |
| एव | एव | indeed |
| याचते | याचते (√याच् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | he asks for |
| सखि | सखि (८.१) | O friend |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| अस्मै | इदम् (४.१) | to him |
| वितर | वितर (वि√तृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | give |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| इति | इति | thus |
| उभे | उभ (१.२) | both |
| मिथः | मिथस् | mutually |
| न | न | not |
| वादात् | वाद (५.१) | due to the argument |
| ददतुः | ददतुः (√दा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | gave |
| किल | किल | indeed |
| ओदनम् | ओदन (२.१) | rice |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | रो | ज | को | शा | भि | न | ये | न | पा | णि | ना |
| स्थि | ते | ऽपि | कू | रे | मु | हु | रे | व | या | च | ते |
| स | खि | त्व | म | स्मै | वि | त | र | त्व | मि | त्यु | भे |
| मि | थो | न | वा | दा | द्द | द | तुः | कि | लौ | द | नम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.