त्वया विधातर्यदकारि चामृतं
कृतं च यज्जीवनमम्बु साधु तत् ।
वृथेदमारम्भि तु सर्वतोमुख-
स्तथोचितः कर्तुमिदंपिबस्तव ॥
त्वया विधातर्यदकारि चामृतं
कृतं च यज्जीवनमम्बु साधु तत् ।
वृथेदमारम्भि तु सर्वतोमुख-
स्तथोचितः कर्तुमिदंपिबस्तव ॥
कृतं च यज्जीवनमम्बु साधु तत् ।
वृथेदमारम्भि तु सर्वतोमुख-
स्तथोचितः कर्तुमिदंपिबस्तव ॥
अन्वयः
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विधातः, त्वया यत् अमृतम् अकारि, यत् च अम्बु जीवनम् कृतम्, तत् साधु। तु इदम् (अमृतम्) वृथा आरम्भि। तव सर्वतोमुखः (जलम्) तथा कर्तुम् उचितः, (यतः) तव अयम् इदम्-पिबः (अस्ति)।
Summary
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The guests praised the drink, addressing the Creator: "O Creator, it was good that you made nectar and made water the source of life. But your creation of nectar was in vain. Your all-pervading water is capable of doing the same, and this drink of yours is proof of that."
पदच्छेदः
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| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| विधातः | विधातृ (८.१) | O Creator |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| अकारि | अकारि (√कृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| च | च | and |
| अमृतम् | अमृत (१.१) | nectar |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was made |
| च | च | and |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| जीवनम् | जीवन (२.१) | life |
| अम्बु | अम्बु (१.१) | water |
| साधु | साधु (१.१) | good |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| वृथा | वृथा | in vain |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| आरम्भि | आरम्भि (आ√रभ् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was begun |
| तु | तु | but |
| सर्वतोमुखः | सर्वतोमुख (१.१) | the all-pervading one (water) |
| तथा | तथा | so |
| उचितः | उचित (१.१) | is fit |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to do |
| इदंपिबः | इदंपिब (१.१) | this drink |
| तव | युष्मद् (६.१) | your |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त्व | या | वि | धा | त | र्य | द | का | रि | चा | मृ | तं |
| कृ | तं | च | य | ज्जी | व | न | म | म्बु | सा | धु | तत् |
| वृ | थे | द | मा | र | म्भि | तु | स | र्व | तो | मु | ख |
| स्त | थो | चि | तः | क | र्तु | मि | दं | पि | ब | स्त | व |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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