विनेतृभर्तृद्वयभीतिदान्तयोः
परस्परस्मादनवाप्तवैशसः ।
अजायत द्वारि नरेन्द्रसेनयोः
समागमः स्फारमुखारवोद्गमः ॥
विनेतृभर्तृद्वयभीतिदान्तयोः
परस्परस्मादनवाप्तवैशसः ।
अजायत द्वारि नरेन्द्रसेनयोः
समागमः स्फारमुखारवोद्गमः ॥
परस्परस्मादनवाप्तवैशसः ।
अजायत द्वारि नरेन्द्रसेनयोः
समागमः स्फारमुखारवोद्गमः ॥
अन्वयः
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विनेतृ-भर्तृ-द्वय-भीति-दान्तयोः नरेन्द्र-सेनयोः परस्परस्मात् अनवाप्त-वैशसः स्फार-मुख-अरव-उद्गमः समागमः द्वारि अजायत ।
Summary
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The two armies of the kings, tamed by fear of their respective trainers and masters, met at the gate. This meeting was marked by loud sounds from their mouths, yet no harm was caused by one to the other.
पदच्छेदः
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| विनेतृभर्तृद्वयभीतिदान्तयोः | विनेतृ–भर्तृ–द्वय–भीति–दान्त (√दम्+क्त, ६.२) | of the two (armies) tamed by the fear of their pair of trainers and masters |
| परस्परस्मात् | परस्पर (५.१) | from each other |
| अनवाप्तवैशसः | अनवाप्त (नञ्√आप्+क्त)–वैशस (१.१) | in which no harm was obtained |
| अजायत | अजायत (√जन् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | happened |
| द्वारि | द्वार (७.१) | at the gate |
| नरेन्द्रसेनयोः | नरेन्द्र–सेना (६.२) | of the two armies of the kings |
| समागमः | समागम (१.१) | the meeting |
| स्फारमुखारवोद्गमः | स्फार–मुख–अरव–उद्गम (१.१) | from which arose loud sounds from mouths |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | ने | तृ | भ | र्तृ | द्व | य | भी | ति | दा | न्त | योः |
| प | र | स्प | र | स्मा | द | न | वा | प्त | वै | श | सः |
| अ | जा | य | त | द्वा | रि | न | रे | न्द्र | से | न | योः |
| स | मा | ग | मः | स्फा | र | मु | खा | र | वो | द्ग | मः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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