निर्दिश्य बन्धूनित इत्युदीरितं
दमेन गत्वार्धपथे कृतार्हणम् ।
विनीतमा द्वारत एव पद्गतां
गतं तमैक्षिष्ट मुदा विदर्भराट् ॥
निर्दिश्य बन्धूनित इत्युदीरितं
दमेन गत्वार्धपथे कृतार्हणम् ।
विनीतमा द्वारत एव पद्गतां
गतं तमैक्षिष्ट मुदा विदर्भराट् ॥
दमेन गत्वार्धपथे कृतार्हणम् ।
विनीतमा द्वारत एव पद्गतां
गतं तमैक्षिष्ट मुदा विदर्भराट् ॥
अन्वयः
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विदर्भ-राट्, इतः बन्धून् निर्दिश्य इति दमेन उदीरितम्, अर्धपथे गत्वा कृत-अर्हणम्, आ द्वारतः एव पद्-गतम्, विनीतम् तम् मुदा ऐक्षिष्ट ।
Summary
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The king of Vidarbha joyfully saw him (Nala), who was humble, who had been honored halfway by Dama after he went and said, 'Here are the relatives,' and who had come on foot right from the gate.
पदच्छेदः
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| निर्दिश्य | निर्दिश्य (निर्√दिश्+ल्यप्) | having pointed out |
| बन्धून् | बन्धु (२.३) | relatives |
| इतः | इतः | here |
| इति | इति | thus |
| उदीरितम् | उदीरित (उद्√ईर्+क्त, २.१) | spoken by |
| दमेन | दम (३.१) | Dama |
| गत्वा | गत्वा (√गम्+क्त्वा) | having gone |
| अर्धपथे | अर्धपथ (७.१) | halfway |
| कृतार्हणम् | कृत (√कृ+क्त)–अर्हण (२.१) | whose worship was performed |
| विनीतम् | विनीत (वि√नी+क्त, २.१) | the humble one |
| आ | आ | up to |
| द्वारतः | द्वारतस् | from the gate |
| एव | एव | indeed |
| पद्गतम् | पद्–गत (√गम्+क्त, २.१) | who had gone on foot |
| तम् | तद् (२.१) | him (Nala) |
| ऐक्षिष्ट | ऐक्षिष्ट (√ईक्ष् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | saw |
| मुदा | मुद् (३.१) | with joy |
| विदर्भराट् | विदर्भ–राज् (१.१) | the king of Vidarbha |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र्दि | श्य | ब | न्धू | नि | त | इ | त्यु | दी | रि | तं |
| द | मे | न | ग | त्वा | र्ध | प | थे | कृ | ता | र्ह | णम् |
| वि | नी | त | मा | द्वा | र | त | ए | व | प | द्ग | तां |
| ग | तं | त | मै | क्षि | ष्ट | मु | दा | वि | द | र्भ | राट् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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