नखेन कृत्वाधरसन्निभां निभा-
द्युवा मृदुव्यञ्जनमांसफालिकाम् ।
ददंश दन्तैः प्रशशंस तद्रसं
विहस्य पश्यन्परिवेषिकाधरम् ॥
नखेन कृत्वाधरसन्निभां निभा-
द्युवा मृदुव्यञ्जनमांसफालिकाम् ।
ददंश दन्तैः प्रशशंस तद्रसं
विहस्य पश्यन्परिवेषिकाधरम् ॥
द्युवा मृदुव्यञ्जनमांसफालिकाम् ।
ददंश दन्तैः प्रशशंस तद्रसं
विहस्य पश्यन्परिवेषिकाधरम् ॥
अन्वयः
AI
युवा निभात् मृदु-व्यञ्जन-मांस-फालिकाम् नखेन अधर-सन्निभाम् कृत्वा, दन्तैः ददंश। विहस्य परिवेषिका-अधरम् पश्यन् तत्-रसम् प्रशशंस।
Summary
AI
A youth cleverly shaped a tender slice of meat from a curry with his fingernail to resemble a lip. He then bit it with his teeth. Smiling and looking at the serving-maid's lip, he praised the taste of the meat.
पदच्छेदः
AI
| नखेन | नख (३.१) | with his fingernail |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | having made |
| अधर | अधर | lip |
| सन्निभाम् | सन्निभा (२.१) | resembling a |
| निभात् | निभ (५.१) | cleverly |
| युवा | युवन् (१.१) | a youth |
| मृदु | मृदु | tender |
| व्यञ्जन | व्यञ्जन | curry |
| मांस | मांस | meat |
| फालिकाम् | फालिका (२.१) | a slice of |
| ददंश | ददंश (√दंश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | bit |
| दन्तैः | दन्त (३.३) | with his teeth |
| प्रशशंस | प्रशशंस (प्र√शंस कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | praised |
| तत् | तद् | its |
| रसम् | रस (२.१) | taste |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | smiling |
| पश्यन् | पश्यत् (√दृश्+शतृ, १.१) | while looking at |
| परिवेषिका | परिवेषिका | of the serving-maid |
| अधरम् | अधर (२.१) | the lip |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | खे | न | कृ | त्वा | ध | र | स | न्नि | भां | नि | भा |
| द्यु | वा | मृ | दु | व्य | ञ्ज | न | मां | स | फा | लि | काम् |
| द | दं | श | द | न्तैः | प्र | श | शं | स | त | द्र | सं |
| वि | ह | स्य | प | श्य | न्प | रि | वे | षि | का | ध | रम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.