कियत्त्यजन्नोदनमानयन्किय-
त्करस्य पप्रच्छ गतागतेन याम् ।
अहं किमेष्यामि किमेष्यसीति सा
व्यधत्त नम्रं किल लज्जयाननम् ॥
कियत्त्यजन्नोदनमानयन्किय-
त्करस्य पप्रच्छ गतागतेन याम् ।
अहं किमेष्यामि किमेष्यसीति सा
व्यधत्त नम्रं किल लज्जयाननम् ॥
त्करस्य पप्रच्छ गतागतेन याम् ।
अहं किमेष्यामि किमेष्यसीति सा
व्यधत्त नम्रं किल लज्जयाननम् ॥
अन्वयः
AI
करस्य गत-आगतेन कियत् ओदनम् त्यजन् कियत् आनयन्, 'अहम् किम् एष्यामि किम् एष्यसि' इति याम् पप्रच्छ, सा किल लज्जया आननम् नम्रम् व्यधत्त।
Summary
AI
A man, by the to-and-fro movement of his hand while serving rice—sometimes leaving a little, sometimes bringing a little—asked a woman, "Shall I come, or will you come?". In response, she, overcome with shyness, lowered her face.
पदच्छेदः
AI
| कियत् | कियत् | a little |
| त्यजन् | त्यजत् (√त्यज्+शतृ, १.१) | leaving |
| ओदनम् | ओदन (२.१) | rice |
| आनयन् | आनयत् (आ√नी+शतृ, १.१) | bringing |
| कियत् | कियत् | a little |
| करस्य | कर (६.१) | of his hand |
| पप्रच्छ | पप्रच्छ (√प्रच्छ् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | he asked |
| गतागतेन | गत–आगत (३.१) | by the coming and going |
| याम् | यद् (२.१) | whom |
| अहम् | अस्मद् (१.१) | I |
| किम् | किम् | (question) |
| एष्यामि | एष्यामि (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) उ.पु. एक.) | shall come |
| किम् | किम् | (question) |
| एष्यसि | एष्यसि (√इ कर्तरि लृट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | will you come |
| इति | इति | thus |
| सा | तद् (१.१) | she |
| व्यधत्त | व्यधत्त (वि√धा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | made |
| नम्रम् | नम्र (२.१) | lowered |
| किल | किल | indeed |
| लज्जया | लज्जा (३.१) | with shyness |
| आननम् | आनन (२.१) | her face |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | य | त्त्य | ज | न्नो | द | न | मा | न | य | न्कि | य |
| त्क | र | स्य | प | प्र | च्छ | ग | ता | ग | ते | न | याम् |
| अ | हं | कि | मे | ष्या | मि | कि | मे | ष्य | सी | ति | सा |
| व्य | ध | त्त | न | म्रं | कि | ल | ल | ज्ज | या | न | नम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.