परस्पराकूतजदूतकृत्ययो-
रनङ्गमाराद्धुमपि क्षणं प्रति ।
निमेषणेनैव कियच्चिरायुषा
जनेषु यूनोरुदपादि निर्णयः ॥
परस्पराकूतजदूतकृत्ययो-
रनङ्गमाराद्धुमपि क्षणं प्रति ।
निमेषणेनैव कियच्चिरायुषा
जनेषु यूनोरुदपादि निर्णयः ॥
रनङ्गमाराद्धुमपि क्षणं प्रति ।
निमेषणेनैव कियच्चिरायुषा
जनेषु यूनोरुदपादि निर्णयः ॥
अन्वयः
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परस्पर-आकूत-ज-दूत-कृत्ययोः यूनोः क्षणम् प्रति अनङ्गम् आराद्धुम् अपि, कियत्-चिर-आयुषा निमेषणेन एव जनेषु निर्णयः उदपादि।
Summary
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For the two young lovers, whose intentions served as messengers to each other, a conclusion about their desire to worship the god of love was made among the people. This conclusion was reached merely by their blinking, an act of very short duration.
पदच्छेदः
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| परस्पर | परस्पर | each other's |
| आकूत | आकूत | intention |
| ज | ज | born from |
| दूत | दूत | messenger |
| कृत्ययोः | कृत्य (६.२) | of the two whose actions |
| अनङ्गम् | अनङ्ग (२.१) | the God of Love |
| आराद्धुम् | आराद्धुम् (आ√राध्+तुमुन्) | to worship |
| अपि | अपि | even |
| क्षणम् | क्षण (२.१) | moment |
| प्रति | प्रति | every |
| निमेषणेन | निमेषण (३.१) | by the blinking |
| एव | एव | only |
| कियत् | कियत् | very |
| चिर | चिर | long |
| आयुषा | आयुस् (३.१) | by the life of (ironic, i.e. short) |
| जनेषु | जन (७.३) | among the people |
| यूनोः | यूनन् (६.२) | of the two youths |
| उदपादि | उदपादि (उद्√पद् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was made |
| निर्णयः | निर्णय (१.१) | a conclusion |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | र | स्प | रा | कू | त | ज | दू | त | कृ | त्य | यो |
| र | न | ङ्ग | मा | रा | द्धु | म | पि | क्ष | णं | प्र | ति |
| नि | मे | ष | णे | नै | व | कि | य | च्चि | रा | यु | षा |
| ज | ने | षु | यू | नो | रु | द | पा | दि | नि | र्ण | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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