भुवाह्वयन्तीं निजतोरणस्रजा
गजालिकर्णानिलखेलया ततः ।
ददर्श दूतीमिव भीमजन्मन-
ह्स तत्प्रतीहारमहीं महीपतिः ॥
भुवाह्वयन्तीं निजतोरणस्रजा
गजालिकर्णानिलखेलया ततः ।
ददर्श दूतीमिव भीमजन्मन-
ह्स तत्प्रतीहारमहीं महीपतिः ॥
गजालिकर्णानिलखेलया ततः ।
ददर्श दूतीमिव भीमजन्मन-
ह्स तत्प्रतीहारमहीं महीपतिः ॥
अन्वयः
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ततः मही-पतिः गज-आलि-कर्ण-अनिल-खेलया निज-तोरण-स्रजा भुवा आह्वयन्तीम् भीम-जन्मनः दूतीम् इव तत्-प्रतीहार-महीम् ददर्श ।
Summary
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Then the king (Nala) saw the ground before the city gate. It seemed like a female messenger from Damayanti, beckoning him with her eyebrow—which was the garland on the gateway, set in motion by the wind from the ears of the rows of elephants.
पदच्छेदः
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| भुवा | भ्रू (३.१) | with her eyebrow |
| आह्वयन्तीं | आह्वयन्ती (आ√ह्वे+शतृ, २.१) | calling |
| निजतोरणस्रजा | निज–तोरण–स्रज् (३.१) | with its own gateway-garland |
| गजालिकर्णानिलखेलया | गज–आलि–कर्ण–अनिल–खेला (३.१) | by the play of the wind from the ears of the row of elephants |
| ततः | ततः | then |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saw |
| दूतीम् | दूती (२.१) | female messenger |
| इव | इव | like |
| भीमजन्मनः | भीमजन्मन् (६.१) | of Damayanti |
| तत्प्रतीहारमहीं | तद्–प्रतीहार–मही (२.१) | the ground before the gate |
| महीपतिः | महीपति (१.१) | the king |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भु | वा | ह्व | य | न्तीं | नि | ज | तो | र | ण | स्र | जा |
| ग | जा | लि | क | र्णा | नि | ल | खे | ल | या | त | तः |
| द | द | र्श | दू | ती | मि | व | भी | म | ज | न्म | न |
| ह्स | त | त्प्र | ती | हा | र | म | हीं | म | ही | प | तिः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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