हरिद्विपद्वीपिभिरांशुकैर्नभो-
नभस्वदाध्मापनपीनितैरभूत् ।
तरस्वदश्वध्वजिनीध्वजैर्वनं
विचित्रचीनाम्बरवल्लिवेल्लिवेल्लितम् ॥
हरिद्विपद्वीपिभिरांशुकैर्नभो-
नभस्वदाध्मापनपीनितैरभूत् ।
तरस्वदश्वध्वजिनीध्वजैर्वनं
विचित्रचीनाम्बरवल्लिवेल्लिवेल्लितम् ॥
नभस्वदाध्मापनपीनितैरभूत् ।
तरस्वदश्वध्वजिनीध्वजैर्वनं
विचित्रचीनाम्बरवल्लिवेल्लिवेल्लितम् ॥
अन्वयः
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नभः-नभस्वत्-आध्मापन-पीनितैः हरित्-द्विप-द्वीपिभिः अंशुकैः तरस्वत्-अश्व-ध्वजिनी-ध्वजैः (च) नभः विचित्र-चीन-अम्बर-वल्लि-वेल्लितम् वनम् अभूत् ।
Summary
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The sky became like a forest, with banners of the swift-horsed army, swollen by the wind. These banners, depicting elephants of the quarters and leopards, looked like variegated Chinese silk creepers entwining the forest of the sky.
पदच्छेदः
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| हरिद्विपद्वीपिभिः | हरित्–द्विप–द्वीपिन् (३.३) | with (cloths depicting) elephants of the quarters and leopards |
| अंशुकैः | अंशुक (३.३) | with cloths |
| नभोनभस्वदाध्मापनपीनितैः | नभस्–नभस्वत्–आध्मापन–पीनित (३.३) | swollen by being blown by the wind of the sky |
| अभूत् | अभूत् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became |
| तरस्वदश्वध्वजिनीध्वजैः | तरस्वत्–अश्व–ध्वजिनी–ध्वज (३.३) | with the banners of the army of swift horses |
| वनं | वन (१.१) | a forest |
| विचित्रचीनाम्बरवल्लिवेल्लितम् | विचित्र–चीन–अम्बर–वल्लि–वेल्लित (१.१) | entwined with creepers of variegated Chinese silk |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ह | रि | द्वि | प | द्वी | पि | भि | रां | शु | कै | र्न | भो | ||
| न | भ | स्व | दा | ध्मा | प | न | पी | नि | तै | र | भूत् | ||
| त | र | स्व | द | श्व | ध्व | जि | नी | ध्व | जै | र्व | नं | ||
| वि | चि | त्र | ची | ना | म्ब | र | व | ल्लि | वे | ल्लि | वे | ल्लि | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||||
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