अमी लसद्बाष्पमखण्डिताखिलं
वियुक्तमन्योन्यममुक्तमाऋदवम् ।
रसोत्तरं गौरमपीवरं रसा-
दभुञ्जतामोदनमोदनं जनाः ॥
अमी लसद्बाष्पमखण्डिताखिलं
वियुक्तमन्योन्यममुक्तमाऋदवम् ।
रसोत्तरं गौरमपीवरं रसा-
दभुञ्जतामोदनमोदनं जनाः ॥
वियुक्तमन्योन्यममुक्तमाऋदवम् ।
रसोत्तरं गौरमपीवरं रसा-
दभुञ्जतामोदनमोदनं जनाः ॥
अन्वयः
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अमी जनाः रसात् आमोदेन लसद्बाष्पम्, अखण्डिताखिलम्, अन्योन्यं वियुक्तम्, अमुक्तमार्दवम्, रसोत्तरं, गौरम्, अपीवरम् ओदनम् अभुञ्जत ।
Summary
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These people, with relish and joy, ate the rice which was steaming, with every grain whole and separate from each other, having not lost its softness, excellent in flavor, white, and plump.
पदच्छेदः
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| अमी | अदस् (१.३) | These |
| लसत्-बाष्पम् | लसत्–बाष्प (२.१) | steaming |
| अखण्डित-अखिलम् | अखण्डित–अखिल (२.१) | with every grain whole |
| वियुक्तम् | वियुक्त (वि√युज्+क्त, २.१) | separated |
| अन्योन्यम् | अन्योन्यम् | from each other |
| अमुक्त-मार्दवम् | अमुक्त–मार्दव (२.१) | not having lost its softness |
| रस-उत्तरम् | रस–उत्तर (२.१) | excellent in flavor |
| गौरम् | गौर (२.१) | white |
| अपीवरम् | अपीवर (२.१) | plump |
| रसात् | रस (५.१) | with relish |
| अभुञ्जत | अभुञ्जत (√भुज् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | ate |
| ओदनम् | ओदन (२.१) | the rice |
| आमोदेन | आमोद (३.१) | with joy |
| जनाः | जन (१.३) | people |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | मी | ल | स | द्बा | ष्प | म | ख | ण्डि | ता | खि | लं | |
| वि | यु | क्त | म | न्यो | न्य | म | मु | क्त | मा | ऋ | द | वम् |
| र | सो | त्त | रं | गौ | र | म | पी | व | रं | र | सा | |
| द | भु | ञ्ज | ता | मो | द | न | मो | द | नं | ज | नाः | |
| ज | त | ज | र | |||||||||
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