पपौ न कोऽपि क्षममास्यमेलितं
जलस्य गण्डूषमुदीतसंमदः ।
चुचुम्ब तत्र प्रतिबिम्बितं मुखं
पुरः स्फुरत्याः स्मरकाऋमुकभ्रुवः ॥
पपौ न कोऽपि क्षममास्यमेलितं
जलस्य गण्डूषमुदीतसंमदः ।
चुचुम्ब तत्र प्रतिबिम्बितं मुखं
पुरः स्फुरत्याः स्मरकाऋमुकभ्रुवः ॥
जलस्य गण्डूषमुदीतसंमदः ।
चुचुम्ब तत्र प्रतिबिम्बितं मुखं
पुरः स्फुरत्याः स्मरकाऋमुकभ्रुवः ॥
अन्वयः
AI
उदीतसंमदः कः अपि आस्यमेलितं जलस्य क्षमं गण्डूषं न पपौ । (किन्तु) तत्र प्रतिबिम्बितं पुरः स्फुरत्याः स्मरकार्मुकभ्रुवः मुखं चुचुम्ब ।
Summary
AI
No one, with joy arisen, drank the mouthful of water brought to their lips. Instead, they kissed the reflection of the face of the woman shining before them, whose eyebrows were like Kama's bow, reflected therein.
पदच्छेदः
AI
| पपौ | पपौ (√पा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | drank |
| न | न | not |
| कः | किम् (१.१) | anyone |
| अपि | अपि | |
| क्षमम् | क्षम (२.१) | a fitting |
| आस्य-मेलितम् | आस्य–मेलित (२.१) | brought to the mouth |
| जलस्य | जल (६.१) | of water |
| गण्डूषम् | गण्डूष (२.१) | mouthful |
| उदीत-संमदः | उदीत–संमद (१.१) | with joy arisen |
| चुचुम्ब | चुचुम्ब (√चुम्ब् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | kissed |
| तत्र | तत्र | therein |
| प्रतिबिम्बितम् | प्रतिबिम्बित (प्रति√बिम्ब्+क्त, २.१) | reflected |
| मुखम् | मुख (२.१) | the face |
| पुरः | पुरस् | in front |
| स्फुरत्याः | स्फुरत् (√स्फुर्+शतृ+ङीप्, ६.१) | of her who was shining |
| स्मर-कार्मुक-भ्रुवः | स्मर–कार्मुक–भ्रू (६.१) | of her with eyebrows like Kama's bow |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प | पौ | न | को | ऽपि | क्ष | म | मा | स्य | मे | लि | तं | |
| ज | ल | स्य | ग | ण्डू | ष | मु | दी | त | सं | म | दः | |
| चु | चु | म्ब | त | त्र | प्र | ति | बि | म्बि | तं | मु | खं | |
| पु | रः | स्फु | र | त्याः | स्म | र | का | ऋ | मु | क | भ्रु | वः |
| ज | त | ज | र | |||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.