कृतं यदन्यत्करणोचितत्यजा
दिदृक्षु चक्षुर्यदवारि बालया ।
हृदस्तदीयस्य तदेव कामुके
जगाद वार्तामखिलां खलुं खलु ॥
कृतं यदन्यत्करणोचितत्यजा
दिदृक्षु चक्षुर्यदवारि बालया ।
हृदस्तदीयस्य तदेव कामुके
जगाद वार्तामखिलां खलुं खलु ॥
दिदृक्षु चक्षुर्यदवारि बालया ।
हृदस्तदीयस्य तदेव कामुके
जगाद वार्तामखिलां खलुं खलु ॥
अन्वयः
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अन्यत्करणोचितत्यजा बालया यत् दिदृक्षु चक्षुः अवारि, यत् (अन्यत्) कृतम्, तत् एव तदीयस्य कामुके हृदः अखिलां वार्तां खलु खलु जगाद ।
Summary
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The fact that the young woman, abandoning all other proper actions, restrained her eager eyes from looking, and whatever else she did out of shyness, that very behavior spoke the entire message of her heart to her lover, indeed.
पदच्छेदः
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| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
| यत् | यद् (१.१) | what |
| अन्यत्-करण-उचित-त्यजा | अन्यत्–करण–उचित–त्यज् (३.१) | by her who abandoned actions proper for other senses |
| दिदृक्षु | दिदृक्षु (√दृश्+सन्+उ, १.१) | desirous of seeing |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | the eye |
| यत् | यद् (१.१) | that |
| अवारि | अवारि (√वृ +णिच् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was restrained |
| बालया | बाला (३.१) | by the young woman |
| हृदः | हृद् (१.१) | the heart |
| तदीयस्य | तदीय (६.१) | of him |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| एव | एव | very |
| कामुके | कामुक (७.१) | in the lover |
| जगाद | जगाद (√गद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | spoke |
| वार्ताम् | वार्ता (२.१) | the message |
| अखिलाम् | अखिला (२.१) | entire |
| खलु | खलु | indeed |
| खलु | खलु | indeed |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ | तं | य | द | न्य | त्क | र | णो | चि | त | त्य | जा |
| दि | दृ | क्षु | च | क्षु | र्य | द | वा | रि | बा | ल | या |
| हृ | द | स्त | दी | य | स्य | त | दे | व | का | मु | के |
| ज | गा | द | वा | र्ता | म | खि | लां | ख | लुं | ख | लु |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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