तिरोवलद्वक्त्रसरोजनालया
स्मिते स्मितं यत्खलु यूनि बालया ।
तया तदीये हृदये निखाय
तद्व्यधीयतासंमुखलक्ष्यवेधिता ॥
तिरोवलद्वक्त्रसरोजनालया
स्मिते स्मितं यत्खलु यूनि बालया ।
तया तदीये हृदये निखाय
तद्व्यधीयतासंमुखलक्ष्यवेधिता ॥
स्मिते स्मितं यत्खलु यूनि बालया ।
तया तदीये हृदये निखाय
तद्व्यधीयतासंमुखलक्ष्यवेधिता ॥
अन्वयः
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यूनि स्मिते (सति), तिरोवलद्वक्त्रसरोजनालया बालया यत् स्मितं (कृतम्), तया तत् तदीये हृदये निखाय असंमुखलक्ष्यवेधिता खलु व्यधीयत ।
Summary
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When the youth smiled, the young woman, whose lotus-like face was turned sideways, smiled back. By doing so, she embedded that smile in his heart, thus accomplishing the feat of hitting a target without facing it.
पदच्छेदः
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| तिरः-वलत्-वक्त्र-सरोज-नालया | तिरस्–वलत्–वक्त्र–सरोज–नाल (३.१) | by her whose lotus-face was turning sideways like a stalk |
| स्मिते | स्मित (√स्मि+क्त, ७.१) | at the smile |
| स्मितम् | स्मित (√स्मि+क्त, १.१) | a smile |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| खलु | खलु | indeed |
| यूनि | युवन् (७.१) | at the youth |
| बालया | बाला (३.१) | by the young woman |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| तदीये | तदीय (७.१) | in his |
| हृदये | हृदय (७.१) | heart |
| निखाय | निखाय (नि√खन्+ल्यप्) | having embedded |
| तत् | तद् (२.१) | that |
| व्यधीयत | व्यधीयत (वि√धा भावकर्मणोः लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was performed |
| असंमुख-लक्ष्य-वेधिता | असंमुख–लक्ष्य–वेधिता (१.१) | the act of piercing a target without facing it |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ति | रो | व | ल | द्व | क्त्र | स | रो | ज | ना | ल | या |
| स्मि | ते | स्मि | तं | य | त्ख | लु | यू | नि | बा | ल | या |
| त | या | त | दी | ये | हृ | द | ये | नि | खा | य | त |
| द्व्य | धी | य | ता | सं | मु | ख | ल | क्ष्य | वे | धि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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