स्वयं कथाभिर्वरपक्षसुभ्रुवः
स्थिरीकृतायाः पदयुग्ममन्तरा ।
परेण पश्चान्निभृतं न्यधापय-
द्ददर्श चादर्शतलं हसन्खलु ॥
स्वयं कथाभिर्वरपक्षसुभ्रुवः
स्थिरीकृतायाः पदयुग्ममन्तरा ।
परेण पश्चान्निभृतं न्यधापय-
द्ददर्श चादर्शतलं हसन्खलु ॥
स्थिरीकृतायाः पदयुग्ममन्तरा ।
परेण पश्चान्निभृतं न्यधापय-
द्ददर्श चादर्शतलं हसन्खलु ॥
अन्वयः
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(कश्चित्) स्वयम् कथाभिः स्थिरीकृतायाः वरपक्षसुभ्रुवः पदयुग्मम् अन्तरा परेण पश्चात् निभृतम् आदर्शसलं न्यधापयत्, हसन् ददर्श च खलु ।
Summary
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While he himself kept a beautiful-browed woman from the groom's side stationary with conversation, he had another person secretly place a mirror between her feet from behind. Then, laughing, he looked at it.
पदच्छेदः
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| स्वयम् | स्वयम् | himself |
| कथाभिः | कथा (३.३) | with stories |
| वर-पक्ष-सुभ्रुवः | वरपक्ष–सुभ्रू (६.१) | of the beautiful-browed woman from the groom's side |
| स्थिरी-कृतायाः | स्थिरीकृत (√स्थिरीकृ+क्त, ६.१) | of her who was made to stand still |
| पद-युग्मम् | पदयुग्म (२.१) | pair of feet |
| अन्तरा | अन्तरा | between |
| परेण | पर (३.१) | by another |
| पश्चात् | पश्चात् | from behind |
| निभृतम् | निभृतम् | secretly |
| न्यधापयत् | न्यधापयत् (नि√धा +णिच् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused to be placed |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | saw |
| च | च | and |
| आदर्श-तलम् | आदर्श–तल (२.१) | a mirror surface |
| हसन् | हसत् (√हस्+शतृ, १.१) | laughing |
| खलु | खलु | indeed |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्व | यं | क | था | भि | र्व | र | प | क्ष | सु | भ्रु | वः |
| स्थि | री | कृ | ता | याः | प | द | यु | ग्म | म | न्त | रा |
| प | रे | ण | प | श्चा | न्नि | भृ | तं | न्य | धा | प | य |
| द्द | द | र्श | चा | द | र्श | त | लं | ह | स | न्ख | लु |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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