पुरःस्थलाङ्गूलमदात्खला वृसी-
मुपाविशत्तत्र ऋजुर्वरद्विजः ।
पुनस्तदुत्थाप्य निजामतेर्वदा-
ऽहसच्च पश्चात्कृतपुच्छतत्प्रदा ॥
पुरःस्थलाङ्गूलमदात्खला वृसी-
मुपाविशत्तत्र ऋजुर्वरद्विजः ।
पुनस्तदुत्थाप्य निजामतेर्वदा-
ऽहसच्च पश्चात्कृतपुच्छतत्प्रदा ॥
मुपाविशत्तत्र ऋजुर्वरद्विजः ।
पुनस्तदुत्थाप्य निजामतेर्वदा-
ऽहसच्च पश्चात्कृतपुच्छतत्प्रदा ॥
अन्वयः
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खला पुरःस्थलाङ्गूलं वृसीम् अदात् । तत्र ऋजुः वरद्विजः उपाविशत् । पुनः पश्चात्कृतपुच्छतत्प्रदा (सा खला) तत् उत्थाप्य, निजामतेः वदा (सती) अहसत् च ।
Summary
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A mischievous woman offered a cushion with a tail-like appendage in front. A simple-minded Brahmin from the groom's party sat on it. Then, the woman, who had placed the 'tail' behind him, lifted the cushion and, speaking of his foolishness, laughed.
पदच्छेदः
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| पुरः-स्थ-लाङ्गूलम् | पुरस्–स्थ–लाङ्गूल (२.१) | a tail placed in front |
| अदात् | अदात् (√दा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| खला | खला (१.१) | a mischievous woman |
| वृसीम् | वृसी (२.१) | a cushion |
| उपाविशत् | उपाविशत् (उप√विश् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sat down |
| तत्र | तत्र | there |
| ऋजुः | ऋजु (१.१) | a simple |
| वर-द्विजः | वर–द्विज (१.१) | Brahmin of the groom's party |
| पुनः | पुनः | again |
| तत् | तद् (२.१) | it |
| उत्थाप्य | उत्थाप्य (उद्√स्था+णिच्+ल्यप्) | having lifted |
| निज-अमतेः | निज–अमति (५.१) | of his own foolishness |
| वदा | वदा (१.१) | speaker |
| अहसत् | अहसत् (√हस् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | laughed |
| च | च | and |
| पश्चात्-कृत-पुच्छ-तत्-प्रदा | पश्चात्–कृत (√कृ+क्त)–पुच्छ–तत्–प्रदा (१.१) | she who had placed that tail behind |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | रः | स्थ | ला | ङ्गू | ल | म | दा | त्ख | ला | वृ | सी |
| मु | पा | वि | श | त्त | त्र | ऋ | जु | र्व | र | द्वि | जः |
| पु | न | स्त | दु | त्था | प्य | नि | जा | म | ते | र्व | दा |
| ऽह | स | च्च | प | श्चा | त्कृ | त | पु | च्छ | त | त्प्र | दा |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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