नलाय वालव्यजनं विधुन्वती
दमस्य दास्या निभृतं पदेऽर्पितात् ।
अहासि लोकैः सरटात्पटोज्झिनी
भयेन जङ्घायतिलङ्घिरंहसः ॥
नलाय वालव्यजनं विधुन्वती
दमस्य दास्या निभृतं पदेऽर्पितात् ।
अहासि लोकैः सरटात्पटोज्झिनी
भयेन जङ्घायतिलङ्घिरंहसः ॥
दमस्य दास्या निभृतं पदेऽर्पितात् ।
अहासि लोकैः सरटात्पटोज्झिनी
भयेन जङ्घायतिलङ्घिरंहसः ॥
अन्वयः
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दमस्य दास्या निभृतं पदे अर्पितात् सरटात् भयेन, जङ्घायतिलङ्घिरंहसः पटोज्झिनी (भूत्वा) नलाय वालव्यजनं विधुन्वती (काचित्) लोकैः अहासि ।
Summary
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A woman fanning Nala was laughed at by the people. A maidservant of Damayanti had secretly placed a lizard on her foot. Out of fear, she threw off her garment and ran with a speed that surpassed even a fast runner.
पदच्छेदः
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| नलाय | नल (४.१) | for Nala |
| वालव्यजनम् | वालव्यजन (२.१) | a chowrie fan |
| विधुन्वती | विधुन्वत् (वि√धू+शतृ+ङीप्, १.१) | fanning |
| दमस्य | दम (६.१) | of Damayanti |
| दास्या | दासी (३.१) | by a maidservant |
| निभृतम् | निभृतम् | secretly |
| पदे | पद (७.१) | on the foot |
| अर्पितात् | अर्पित (√ऋ+णिच्+क्त, ५.१) | from the placed |
| अहासि | अहासि (√हस् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was laughed at |
| लोकैः | लोक (३.३) | by the people |
| सरटात् | सरट (५.१) | from a lizard |
| पट-उज्झिनी | पट–उज्झिनी (१.१) | one who throws off her garment |
| भयेन | भय (३.१) | with fear |
| जङ्घायति-लङ्घि-रंहसः | जङ्घायति–लङ्घि–रंहस् (१.१) | whose speed surpasses a fast runner |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ला | य | वा | ल | व्य | ज | नं | वि | धु | न्व | ती |
| द | म | स्य | दा | स्या | नि | भृ | तं | प | दे | ऽर्पि | तात् |
| अ | हा | सि | लो | कैः | स | र | टा | त्प | टो | ज्झि | नी |
| भ | ये | न | ज | ङ्घा | य | ति | ल | ङ्घि | रं | ह | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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