मदान्मदग्रे भवताथवा भिया
परं दिगन्तादपि यात जीवत ।
इति स्म यो दिक्करिणः स्वकर्णयो-
र्विनैव वर्णस्रजमागतैर्गतैः ॥
मदान्मदग्रे भवताथवा भिया
परं दिगन्तादपि यात जीवत ।
इति स्म यो दिक्करिणः स्वकर्णयो-
र्विनैव वर्णस्रजमागतैर्गतैः ॥
परं दिगन्तादपि यात जीवत ।
इति स्म यो दिक्करिणः स्वकर्णयो-
र्विनैव वर्णस्रजमागतैर्गतैः ॥
अन्वयः
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यः स्वकर्णयोः आगतैः गतैः (शब्दैः) विना एव वर्णस्रजम् दिक्करिणः 'मदात् मत् अग्रे भवत, अथवा भिया परम् दिगन्तात् अपि यात, जीवत' इति स्म (अशिक्षयत्) ।
Summary
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Nala, through the coming and going (flapping) of his own ears, taught the elephants of the quarters without even a garland of letters (speech), saying: 'Either stand before me out of pride, or go beyond the ends of the earth out of fear, and live.'
पदच्छेदः
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| मदात् | मद (५.१) | out of pride |
| मत् | अस्मद् (६.१) | my |
| अग्रे | अग्र (७.१) | in front |
| भवत | भवत (√भू कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | be |
| अथवा | अथवा | or |
| भिया | भी (३.१) | out of fear |
| परम् | परम् | beyond |
| दिगन्तात् | दिगन्त (५.१) | the end of the quarters |
| अपि | अपि | even |
| यात | यात (√या कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | go |
| जीवत | जीवत (√जीव् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | live |
| इति | इति | thus |
| स्म | स्म | (indicates past tense) |
| यः | यद् (१.१) | who |
| दिक्करिणः | दिक्करिन् (२.३) | the elephants of the quarters |
| स्वकर्णयोः | स्व–कर्ण (७.२) | in his own two ears |
| विना | विना | without |
| एव | एव | even |
| वर्णस्रजम् | वर्ण–स्रज् (२.१) | a garland of letters (speech) |
| आगतैः | आगत (आ√गम्+क्त, ३.३) | by the comings |
| गतैः | गत (√गम्+क्त, ३.३) | and goings (of his ears flapping) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | दा | न्म | द | ग्रे | भ | व | ता | थ | वा | भि | या |
| प | रं | दि | ग | न्ता | द | पि | या | त | जी | व | त |
| इ | ति | स्म | यो | दि | क्क | रि | णः | स्व | क | र्ण | यो |
| र्वि | नै | व | व | र्ण | स्र | ज | मा | ग | तै | र्ग | तैः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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