अधारि यः प्राङ्नहिषासुरद्विषा
कृपाणमस्मै तमदत्त कूकुदः ।
अहायि तस्या हि धवार्धमज्जिना
स दक्षिणार्धेन पराङ्गदारणः ॥
अधारि यः प्राङ्नहिषासुरद्विषा
कृपाणमस्मै तमदत्त कूकुदः ।
अहायि तस्या हि धवार्धमज्जिना
स दक्षिणार्धेन पराङ्गदारणः ॥
कृपाणमस्मै तमदत्त कूकुदः ।
अहायि तस्या हि धवार्धमज्जिना
स दक्षिणार्धेन पराङ्गदारणः ॥
अन्वयः
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यः कृपाणः प्राक् महिष-असुर-द्विषा अधारि, कूकुदः तम् अस्मै अदत्त । हि सः पर-अङ्ग-दारणः तस्याः धव-अर्ध-मज्जिना दक्षिण-अर्धेन अहायि ।
Summary
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The king (Bhima) gave Nala that sword which was formerly wielded by the enemy of Mahishasura (Durga). For that sword, which tears the limbs of enemies, was abandoned by her right half, which is merged into half of her husband (Shiva, in the Ardhanarishvara form).
पदच्छेदः
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| अधारि | अधारि (√धृ भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was held |
| यः | यद् (१.१) | which |
| प्राक् | प्राच् | formerly |
| महिषासुरद्विषा | महिष–असुर–द्विष् (३.१) | by the enemy of Mahishasura (Durga) |
| कृपाणम् | कृपाण (२.१) | sword |
| अस्मै | इदम् (४.१) | to him (Nala) |
| तम् | तद् (२.१) | that |
| अदत्त | अदत्त (√दा कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | gave |
| कूकुदः | कूकुद (१.१) | the king (Bhima) |
| अहायि | अहायि (√हा भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was abandoned |
| तस्याः | तद् (६.१) | of her |
| हि | हि | for |
| धवार्धमज्जिना | धव–अर्ध–मज्जिन् (३.१) | by one who is merged in half of her husband |
| सः | तद् (१.१) | it (the sword) |
| दक्षिणार्धेन | दक्षिण–अर्ध (३.१) | by the right half |
| पराङ्गदारणः | पर–अङ्ग–दारण (१.१) | which tears the limbs of enemies |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | धा | रि | यः | प्रा | ङ्न | हि | षा | सु | र | द्वि | षा |
| कृ | पा | ण | म | स्मै | त | म | द | त्त | कू | कु | दः |
| अ | हा | यि | त | स्या | हि | ध | वा | र्ध | म | ज्जि | ना |
| स | द | क्षि | णा | र्धे | न | प | रा | ङ्ग | दा | र | णः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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