विदर्भजायाः करवारिजेन
यन्नलस्य पाणेरुपरि स्थितं किल
विशङ्क्य सूत्रं पुरुषायितस्य
तद्भविष्यतोऽस्मायि तदा तदालिभ्-
इः
विदर्भजायाः करवारिजेन
यन्नलस्य पाणेरुपरि स्थितं किल
विशङ्क्य सूत्रं पुरुषायितस्य
तद्भविष्यतोऽस्मायि तदा तदालिभ्-
इः
यन्नलस्य पाणेरुपरि स्थितं किल
विशङ्क्य सूत्रं पुरुषायितस्य
तद्भविष्यतोऽस्मायि तदा तदालिभ्-
इः
अन्वयः
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तदा विदर्भ-जायाः कर-वारिजेन नलस्य पाणेः उपरि यत् स्थितम् किल, तत् भविष्यतः पुरुषायितस्य सूत्रम् विशङ्क्य तत्-आलिभिः अस्मायि ।
Summary
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When Damayanti's lotus-like hand was placed upon Nala's hand, her friends smiled. They suspected that this act was the beginning (sutra) of her future 'purushayita', where she would take the dominant role in their love-play.
पदच्छेदः
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| विदर्भजायाः | विदर्भजा (६.१) | of Damayanti |
| करवारिजेन | कर–वारिज (३.१) | by the lotus-like hand |
| यत् | यद् (१.१) | which |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| पाणेः | पाणि (६.१) | of the hand |
| उपरि | उपरि | upon |
| स्थितम् | स्थित (√स्था+क्त, १.१) | was placed |
| किल | किल | indeed |
| विशङ्क्य | विशङ्क्य (वि√शङ्क्+ल्यप्) | suspecting |
| सूत्रम् | सूत्र (२.१) | the beginning |
| पुरुषायितस्य | पुरुषायित (६.१) | of the 'purushayita' |
| तत् | तद् (१.१) | that (act) |
| भविष्यतः | भविष्यत् (√भू+श्यत्, ६.१) | of the future |
| अस्मायि | अस्मायि (√स्मि भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was smiled at |
| तदा | तदा | then |
| तदालिभिः | तद्–आलि (३.३) | by her female friends |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | द | र्भ | जा | याः | क | र | वा | रि | जे | न | य |
| न्न | ल | स्य | पा | णे | रु | प | रि | स्थि | तं | कि | ल |
| वि | श | ङ्क्य | सू | त्रं | पु | रु | षा | यि | त | स्य | त |
| द्भ | वि | ष्य | तो | ऽस्मा | यि | त | दा | त | दा | लि | भिः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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