तदेकतानस्य नृपस्य रक्षितुं
चिरोढया भावमिवात्मनि श्रिया ।
विहाय सापत्न्यमरञ्जि भीमजा
समग्रतद्वाञ्छितपूर्तिवृत्तिभिः ॥
तदेकतानस्य नृपस्य रक्षितुं
चिरोढया भावमिवात्मनि श्रिया ।
विहाय सापत्न्यमरञ्जि भीमजा
समग्रतद्वाञ्छितपूर्तिवृत्तिभिः ॥
चिरोढया भावमिवात्मनि श्रिया ।
विहाय सापत्न्यमरञ्जि भीमजा
समग्रतद्वाञ्छितपूर्तिवृत्तिभिः ॥
अन्वयः
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भीमजा, तत्-एकतानस्य नृपस्य आत्मनि चिर-ऊढया श्रिया भावं रक्षितुम् इव, सापत्न्यं विहाय, समग्र-तत्-वाञ्छित-पूर्ति-वृत्तिभिः अरञ्जि।
Summary
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Bhima's daughter, Damayanti, pleased the king by fulfilling all his desires. It was as if, to protect the affection of the royal fortune (Shri) long-established in the heart of the king who was devoted to her, Damayanti had given up her rivalry with Shri.
पदच्छेदः
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| तदेकतानस्य | तत्–एकतान (६.१) | of the one devoted to her (Shri) |
| नृपस्य | नृप (६.१) | of the king |
| रक्षितुं | रक्षितुम् (√रक्ष्+तुमुन्) | to protect |
| चिरोढया | चिर–ऊढा (३.१) | long-established |
| भावम् | भाव (२.१) | affection |
| इव | इव | as if |
| आत्मनि | आत्मन् (७.१) | in the heart |
| श्रिया | श्री (३.१) | of the royal fortune (Shri) |
| विहाय | विहाय (वि√हा+ल्यप्) | having given up |
| सापत्न्यम् | सापत्न्य (२.१) | rivalry |
| अरञ्जि | अरञ्जि (√रञ्ज् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was pleased |
| भीमजा | भीमजा (१.१) | Bhima's daughter (Damayanti) |
| समग्रतद्वाञ्छितपूर्तिवृत्तिभिः | समग्र–तत्–वाञ्छित–पूर्ति–वृत्ति (३.३) | by the acts of fulfilling all his desires |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दे | क | ता | न | स्य | नृ | प | स्य | र | क्षि | तुं |
| चि | रो | ढ | या | भा | व | मि | वा | त्म | नि | श्रि | या |
| वि | हा | य | सा | प | त्न्य | म | र | ञ्जि | भी | म | जा |
| स | म | ग्र | त | द्वा | ञ्छि | त | पू | र्ति | वृ | त्ति | भिः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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