उवास वैदर्भगृहेषु पञ्चषा
निशाः कृशाङ्गीं परिणीय तां नलः ।
अथ प्रतस्थे निषधान्सहानया
रथेन वार्ष्णेयगृहीतरश्मिना ॥
उवास वैदर्भगृहेषु पञ्चषा
निशाः कृशाङ्गीं परिणीय तां नलः ।
अथ प्रतस्थे निषधान्सहानया
रथेन वार्ष्णेयगृहीतरश्मिना ॥
निशाः कृशाङ्गीं परिणीय तां नलः ।
अथ प्रतस्थे निषधान्सहानया
रथेन वार्ष्णेयगृहीतरश्मिना ॥
अन्वयः
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नलः तां कृश-अङ्गीं परिणीय वैदर्भ-गृहेषु पञ्चषाः निशाः उवास। अथ अनया सह वार्ष्णेय-गृहीत-रश्मिना रथेन निषधान् प्रतस्थे।
Summary
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Having married the slender-bodied Damayanti, Nala stayed in the house of the Vidarbha king for five or six nights. Then, he set out for the Nishadha kingdom with her in a chariot whose reins were held by Varshneya.
पदच्छेदः
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| उवास | उवास (√वस् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | stayed |
| वैदर्भगृहेषु | वैदर्भ–गृह (७.३) | in the houses of Vidarbha |
| पञ्चषाः | पञ्चष (२.३) | five or six |
| निशाः | निशा (२.३) | nights |
| कृशाङ्गीं | कृश–अङ्गी (२.१) | the slender-bodied one |
| परिणीय | परिणीय (परि√नी+ल्यप्) | having married |
| तां | तद् (२.१) | her |
| नलः | नल (१.१) | Nala |
| अथ | अथ | Then |
| प्रतस्थे | प्रतस्थे (प्र√स्था कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | set out |
| निषधान् | निषध (२.३) | for the Nishadha kingdom |
| सह | सह | with |
| अनया | इदम् (३.१) | her |
| रथेन | रथ (३.१) | by a chariot |
| वार्ष्णेयगृहीतरश्मिना | वार्ष्णेय–गृहीत–रश्मिन् (३.१) | whose reins were held by Varshneya |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | वा | स | वै | द | र्भ | गृ | हे | षु | प | ञ्च | षा |
| नि | शाः | कृ | शा | ङ्गीं | प | रि | णी | य | तां | न | लः |
| अ | थ | प्र | त | स्थे | नि | ष | धा | न्स | हा | न | या |
| र | थे | न | वा | र्ष्णे | य | गृ | ही | त | र | श्मि | ना |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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