विलोकिते रागितरेण सस्मितं
ह्रियाथ वैमुख्यमिते सखीजने ।
तदालिरानीय कुतोऽपि शार्करीं
करे ददौ तस्य विहस्य पुत्रिकाम् ॥
विलोकिते रागितरेण सस्मितं
ह्रियाथ वैमुख्यमिते सखीजने ।
तदालिरानीय कुतोऽपि शार्करीं
करे ददौ तस्य विहस्य पुत्रिकाम् ॥
ह्रियाथ वैमुख्यमिते सखीजने ।
तदालिरानीय कुतोऽपि शार्करीं
करे ददौ तस्य विहस्य पुत्रिकाम् ॥
अन्वयः
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अथ रागि-तरेण स-स्मितम् विलोकिते (सति), सखी-जने ह्रिया वैमुख्यम् इते (सति), तत्-आलिः कुतः अपि शार्करीम् पुत्रिकाम् आनीय, विहस्य तस्य करे ददौ।
Summary
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When a rather passionate youth looked at a maid with a smile, and she and her friends turned their faces away in shyness, that maid's friend brought a sugar doll from somewhere, and smiling, placed it in his hand.
पदच्छेदः
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| विलोकिते | विलोकित (वि√लोक्+क्त, ७.१) | when it was looked at |
| रागितरेण | रागिन्–तर (३.१) | by the more passionate one |
| सस्मितं | सस्मितम् | with a smile |
| ह्रिया | ह्री (३.१) | with shyness |
| अथ | अथ | then |
| वैमुख्यम् | वैमुख्य (२.१) | averted face |
| इते | इत (√इ+क्त, ७.१) | gone to |
| सखीजने | सखी–जन (७.१) | the group of maids |
| तदालिः | तद्–आलि (१.१) | her friend |
| आनीय | आनीय (आ√नी+ल्यप्) | having brought |
| कुतः | कुतस् | from where |
| अपि | अपि | some |
| शार्करीं | शार्करी (२.१) | made of sugar |
| करे | कर (७.१) | in the hand |
| ददौ | ददौ (√दा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | gave |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| विहस्य | विहस्य (वि√हस्+ल्यप्) | having smiled |
| पुत्रिकाम् | पुत्रिका (२.१) | a doll |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | लो | कि | ते | रा | गि | त | रे | ण | स | स्मि | तं |
| ह्रि | या | थ | वै | मु | ख्य | मि | ते | स | खी | ज | ने |
| त | दा | लि | रा | नी | य | कु | तो | ऽपि | शा | र्क | रीं |
| क | रे | द | दौ | त | स्य | वि | ह | स्य | पु | त्रि | काम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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