इत्यालेपुरनुप्रतीकनिलयालंकारसारश्रिया-
हंकुर्वत्तनुरामणीयकममूरालोक्य पौरप्रियाः ।
सानन्दाः कुरुविन्दसुन्दरकरस्यानन्दनं स्यन्दनं
तस्याध्यास्य यतः शतक्रतुहरित्क्रीडाद्रिमिन्दोरिव ॥
इत्यालेपुरनुप्रतीकनिलयालंकारसारश्रिया-
हंकुर्वत्तनुरामणीयकममूरालोक्य पौरप्रियाः ।
सानन्दाः कुरुविन्दसुन्दरकरस्यानन्दनं स्यन्दनं
तस्याध्यास्य यतः शतक्रतुहरित्क्रीडाद्रिमिन्दोरिव ॥
हंकुर्वत्तनुरामणीयकममूरालोक्य पौरप्रियाः ।
सानन्दाः कुरुविन्दसुन्दरकरस्यानन्दनं स्यन्दनं
तस्याध्यास्य यतः शतक्रतुहरित्क्रीडाद्रिमिन्दोरिव ॥
अन्वयः
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पौर-प्रियाः अनुप्रतीक-निलय-अलंकार-सार-श्रिया अहंकुर्वत्-तनु-रामणीयकम् अमूम् आलोक्य इति आलेपुः । स-आनन्दाः (भूत्वा) तस्य कुरुविन्द-सुन्दर-करस्य आनन्दनम् स्यन्दनम् अध्यास्य यतः, इन्दोः शतक्रतु-हरित्-क्रीडा-अद्रिम् इव ।
Summary
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Thus spoke the beloved women of the city, seeing Damayanti whose bodily loveliness was proud with the essential beauty of ornaments on every limb. They were joyful as Nala, whose taxes were as beautiful as rubies, ascended his delighting chariot and departed, like the moon ascending the Udayagiri mountain, Indra's pleasure-mountain in the east.
पदच्छेदः
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| इति | इति | thus |
| आलेपुः | आलेपुः (आ√लिप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they spoke |
| अनुप्रतीकनिलयालंकारसारश्रिया | अनुप्रतीक–निलय–अलंकार–सार–श्री (३.१) | with the beauty that was the essence of ornaments residing on every limb |
| अहंकुर्वत्तनुरामणीयकममूम् | अहंकुर्वत् (√कृ+शतृ)–तनु–रामणीयक–अदस् (२.१) | her, whose bodily loveliness was proud |
| आलोक्य | आलोक्य (आ√लोक्+ल्यप्) | having seen |
| पौरप्रियाः | पौर–प्रिया (१.३) | the beloved women of the city |
| सानन्दाः | स-आनन्द (१.३) | joyful |
| कुरुविन्दसुन्दरकरस्य | कुरुविन्द–सुन्दर–कर (६.१) | of him whose taxes are as beautiful as rubies |
| आनन्दनम् | आनन्दन (२.१) | delighting |
| स्यन्दनम् | स्यन्दन (२.१) | chariot |
| तस्य | तद् (६.१) | his |
| अध्यास्य | अध्यास्य (अधि√आस्+ल्यप्) | having ascended |
| यतः | यत् (√या+शतृ, १.१) | as he went |
| शतक्रतुहरित्क्रीडाद्रिम् | शतक्रतु–हरित्–क्रीडा–अद्रि (२.१) | the pleasure-mountain of the eastern direction of Indra |
| इन्दोः | इन्दु (६.१) | of the moon |
| इव | इव | like |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | त्या | ले | पु | र | नु | प्र | ती | क | नि | ल | या | लं | का | र | सा | र | श्रि | या |
| हं | कु | र्व | त्त | नु | रा | म | णी | य | क | म | मू | रा | लो | क्य | पौ | र | प्रि | याः |
| सा | न | न्दाः | कु | रु | वि | न्द | सु | न्द | र | क | र | स्या | न | न्द | नं | स्य | न्द | नं |
| त | स्या | ध्या | स्य | य | तः | श | त | क्र | तु | ह | रि | त्क्री | डा | द्रि | मि | न्दो | रि | व |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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