वैदर्भीविपुलानुरागकलनात्सौभाग्यमत्राखिल-
क्षोणीचक्रशतक्रतौ निजगदे तद्बृत्तवृत्तक्रमैः ।
किंचास्माकनरेन्द्रभूसुभगतासंभूतये लग्नकं
देवेन्द्रावरणप्रसादितशचीविश्राणिताशीर्वचः ॥
वैदर्भीविपुलानुरागकलनात्सौभाग्यमत्राखिल-
क्षोणीचक्रशतक्रतौ निजगदे तद्बृत्तवृत्तक्रमैः ।
किंचास्माकनरेन्द्रभूसुभगतासंभूतये लग्नकं
देवेन्द्रावरणप्रसादितशचीविश्राणिताशीर्वचः ॥
क्षोणीचक्रशतक्रतौ निजगदे तद्बृत्तवृत्तक्रमैः ।
किंचास्माकनरेन्द्रभूसुभगतासंभूतये लग्नकं
देवेन्द्रावरणप्रसादितशचीविश्राणिताशीर्वचः ॥
अन्वयः
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अत्र अखिल-क्षोणी-चक्र-शतक्रतौ (नले) वैदर्भी-विपुल-अनुराग-कलनात् सौभाग्यम् तत्-बृत्त-वृत्त-क्रमैः निजगदे । किम् च अस्माक-नरेन्द्र-भू-सुभगता-संभूतये देव-इन्द्र-आवरण-प्रसादित-शची-विश्राणित-आशीः-वचः लग्नकम् (अस्ति) ।
Summary
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The good fortune of this Nala, the Indra of the entire earth, was declared by the metrical compositions of that story (his marriage), arising from his winning Damayanti's great love. Moreover, the words of blessing bestowed by Sachi, who was pleased by Damayanti's rejection of Indra, served as the auspicious horoscope for the prosperity of our king's land.
पदच्छेदः
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| वैदर्भीविपुलानुरागकलनात् | वैदर्भी–विपुल–अनुराग–कलन (५.१) | from obtaining the great love of Damayanti |
| सौभाग्यम् | सौभाग्य (१.१) | good fortune |
| अत्र | अत्र | in this one |
| अखिलक्षोणीचक्रशतक्रतौ | अखिल–क्षोणी–चक्र–शतक्रतु (७.१) | in this Indra of the entire circle of the earth |
| निजगदे | निजगदे (नि√गद् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was declared |
| तद्बृत्तवृत्तक्रमैः | तद्–बृत्त–वृत्त–क्रम (३.३) | by the sequences of meters of that story |
| किंचास्माकनरेन्द्रभूसुभगतासंभूतये | किम्–च–अस्मद्–नरेन्द्र–भू–सुभगता–संभूति (४.१) | and for the arising of the good fortune of our king's land |
| लग्नकम् | लग्नक (१.१) | the auspicious horoscope |
| देवेन्द्रावरणप्रसादितशचीविश्राणिताशीर्वचः | देव–इन्द्र–आवरण–प्रसादित (प्र√सद्+णिच्+क्त)–शची–विश्राणित (वि√श्रण्+णिच्+क्त)–आशिस्–वचस् (१.१) | the words of blessing bestowed by Sachi, who was pleased by the rejection of Indra |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वै | द | र्भी | वि | पु | ला | नु | रा | ग | क | ल | ना | त्सौ | भा | ग्य | म | त्रा | खि | ल |
| क्षो | णी | च | क्र | श | त | क्र | तौ | नि | ज | ग | दे | त | द्बृ | त्त | वृ | त्त | क्र | मैः |
| किं | चा | स्मा | क | न | रे | न्द्र | भू | सु | भ | ग | ता | सं | भू | त | ये | ल | ग्न | कं |
| दे | वे | न्द्रा | व | र | ण | प्र | सा | दि | त | श | ची | वि | श्रा | णि | ता | शी | र्व | चः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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