मा जानीत विदर्भजामविदुषीं कीर्तिं मुदः श्रोयसीं
सेयं भद्रमचीकरन्मघवता न स्वां द्वितीयां शचीम् ।
कः शच्या रचयांचकार चरिते काव्यं स नः कथ्यता-
मेतस्यास्तु करिष्यते रसधुनीपात्रे चरित्रे न कैः ॥
मा जानीत विदर्भजामविदुषीं कीर्तिं मुदः श्रोयसीं
सेयं भद्रमचीकरन्मघवता न स्वां द्वितीयां शचीम् ।
कः शच्या रचयांचकार चरिते काव्यं स नः कथ्यता-
मेतस्यास्तु करिष्यते रसधुनीपात्रे चरित्रे न कैः ॥
सेयं भद्रमचीकरन्मघवता न स्वां द्वितीयां शचीम् ।
कः शच्या रचयांचकार चरिते काव्यं स नः कथ्यता-
मेतस्यास्तु करिष्यते रसधुनीपात्रे चरित्रे न कैः ॥
अन्वयः
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विदर्भजाम् मुदः कीर्तिम् श्रेयसीम् अविदुषीम् मा जानीत । सा इयम् मघवता स्वाम् द्वितीयाम् शचीम् न (कृत्वा) भद्रम् अचीकरत् । कः शच्याः चरिते काव्यम् रचयांचकार? सः नः कथ्यताम् । तु एतस्याः रस-धुनी-पात्रे चरिते कैः (काव्यम्) न करिष्यते?
Summary
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Do not think Damayanti ignorant for not knowing that fame is better than pleasure. By not making herself a second Sachi for Indra, she did a good thing. Who has composed a poem on the life of Sachi? Let him be told to us. But on the life of this Damayanti, a vessel for the river of poetic sentiment, by whom will a poem not be composed?
पदच्छेदः
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| मा | मा | do not |
| जानीत | जानीत (√ज्ञा कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. बहु.) | know |
| विदर्भजाम् | विदर्भजा (२.१) | Damayanti |
| अविदुषीम् | अविद्वस् (√विद्+क्वसु, २.१) | ignorant |
| कीर्तिम् | कीर्ति (२.१) | fame |
| मुदः | मुद् (५.१) | than joy |
| श्रेयसीम् | श्रेयस् (२.१) | better |
| सा | तद् (१.१) | she |
| इयम् | इदम् (१.१) | this one |
| भद्रम् | भद्र (२.१) | good |
| अचीकरत् | अचीकरत् (√कृ +णिच् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | caused to do |
| मघवता | मघवन् (३.१) | by Indra |
| न | न | not |
| स्वाम् | स्व (२.१) | his own |
| द्वितीयाम् | द्वितीय (२.१) | second |
| शचीम् | शची (२.१) | Sachi |
| कः | किम् (१.१) | who |
| शच्याः | शची (६.१) | of Sachi |
| चरिते | चरित (७.१) | on the life |
| काव्यम् | काव्य (२.१) | poem |
| रचयांचकार | रचयांचकार (√रच् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | composed |
| सः | तद् (१.१) | he |
| नः | अस्मद् (४.३) | to us |
| कथ्यताम् | कथ्यताम् (√कथ् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be told |
| एतस्याः | एतद् (६.१) | of this one |
| तु | तु | but |
| करिष्यते | करिष्यते (√कृ भावकर्मणोः लृट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | will be made |
| रसधुनीपात्रे | रस–धुनी–पात्र (७.१) | which is a vessel for the river of poetic sentiment |
| चरित्रे | चरित्र (७.१) | on the life |
| न | न | not |
| कैः | किम् (३.३) | by whom |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मा | जा | नी | त | वि | द | र्भ | जा | म | वि | दु | षीं | की | र्तिं | मु | दः | श्रो | य | सीं |
| से | यं | भ | द्र | म | ची | क | र | न्म | घ | व | ता | न | स्वां | द्वि | ती | यां | श | चीम् |
| कः | श | च्या | र | च | यां | च | का | र | च | रि | ते | का | व्यं | स | नः | क | थ्य | ता |
| मे | त | स्या | स्तु | क | रि | ष्य | ते | र | स | धु | नी | पा | त्रे | च | रि | त्रे | न | कैः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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