अर्थी सर्वसुपर्वणां पतिरसावेतस्य यूनः कृते
पर्यत्याजि विदर्भराजसुतया युक्तं विशेषज्ञया ।
अस्मिन्नाम तया वृते सुमनसः सन्तोऽपि यन्निर्जरा
जाता दुर्मनसो न सोढुमुचिता तेषां तु साऽनौचिती ॥
अर्थी सर्वसुपर्वणां पतिरसावेतस्य यूनः कृते
पर्यत्याजि विदर्भराजसुतया युक्तं विशेषज्ञया ।
अस्मिन्नाम तया वृते सुमनसः सन्तोऽपि यन्निर्जरा
जाता दुर्मनसो न सोढुमुचिता तेषां तु साऽनौचिती ॥
पर्यत्याजि विदर्भराजसुतया युक्तं विशेषज्ञया ।
अस्मिन्नाम तया वृते सुमनसः सन्तोऽपि यन्निर्जरा
जाता दुर्मनसो न सोढुमुचिता तेषां तु साऽनौचिती ॥
अन्वयः
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सर्व-सुपर्वणाम् पतिः असौ अर्थी (आसीत्) । विशेषज्ञया विदर्भ-राज-सुतया एतस्य यूनः कृते (असौ) पर्यत्याजि, (तत्) युक्तम् । यत् अस्मिन् तया वृते (सति) सुमनसः सन्तः अपि निर्जराः दुर्मनसः जाताः, तेषाम् सा अनौचिती तु सोढुम् उचिता न ।
Summary
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That lord of all gods (Indra) was a supplicant. It was fitting that he was rejected for the sake of this youth by the discerning daughter of the Vidarbha king. But that the gods, though being 'good-hearted' (sumanas), became dejected when he was chosen by her—that impropriety of theirs is not fit to be tolerated.
पदच्छेदः
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| अर्थी | अर्थिन् (१.१) | a supplicant |
| सर्वसुपर्वणाम् | सर्व–सुपर्वन् (६.३) | of all the gods |
| पतिः | पति (१.१) | the lord |
| असौ | अदस् (१.१) | that one |
| एतस्य | एतद् (६.१) | of this |
| यूनः | युवन् (६.१) | youth |
| कृते | कृते | for the sake of |
| पर्यत्याजि | पर्यत्याजि (परि√त्यज् भावकर्मणोः लुङ् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was abandoned |
| विदर्भराजसुतया | विदर्भ–राज–सुता (३.१) | by the daughter of the king of Vidarbha |
| युक्तम् | युक्त (√युज्+क्त, १.१) | proper |
| विशेषज्ञया | विशेषज्ञ (३.१) | by the discerning one |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | this one |
| नाम | नाम | indeed |
| तया | तद् (३.१) | by her |
| वृते | वृत (√वृ+क्त, ७.१) | having been chosen |
| सुमनसः | सुमनस् (१.३) | good-hearted |
| सन्तः | सत् (√अस्+शतृ, १.३) | being |
| अपि | अपि | even |
| यत् | यद् | that |
| निर्जराः | निर्जर (१.३) | the gods |
| जाताः | जात (√जन्+क्त, १.३) | became |
| दुर्मनसः | दुर्मनस् (१.३) | dejected |
| न | न | not |
| सोढुम् | सोढुम् (√सह्+तुमुन्) | to bear |
| उचिता | उचित (१.१) | proper |
| तेषाम् | तद् (६.३) | their |
| तु | तु | but |
| सा | तद् (१.१) | that |
| अनौचिती | अनौचिती (१.१) | impropriety |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | र्थी | स | र्व | सु | प | र्व | णां | प | ति | र | सा | वे | त | स्य | यू | नः | कृ | ते |
| प | र्य | त्या | जि | वि | द | र्भ | रा | ज | सु | त | या | यु | क्तं | वि | शे | ष | ज्ञ | या |
| अ | स्मि | न्ना | म | त | या | वृ | ते | सु | म | न | सः | स | न्तो | ऽपि | य | न्नि | र्ज | रा |
| जा | ता | दु | र्म | न | सो | न | सो | ढु | मु | चि | ता | ते | षां | तु | सा | ऽनौ | चि | ती |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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