लसन्नखादर्शमुखाम्बुजस्मित-
प्रसूनवाणीमधुपाणिपल्लवम् ।
यियासतस्तस्य नृपस्य जज्ञिरे
प्रशस्तवस्तूनि तदेवयौवतम् ॥
लसन्नखादर्शमुखाम्बुजस्मित-
प्रसूनवाणीमधुपाणिपल्लवम् ।
यियासतस्तस्य नृपस्य जज्ञिरे
प्रशस्तवस्तूनि तदेवयौवतम् ॥
प्रसूनवाणीमधुपाणिपल्लवम् ।
यियासतस्तस्य नृपस्य जज्ञिरे
प्रशस्तवस्तूनि तदेवयौवतम् ॥
अन्वयः
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यियासतः तस्य नृपस्य लसन्नखादर्शमुखाम्बुजस्मितप्रसूनवाणीमधुपाणिपल्लवम् तत् यौवतम् एव प्रशस्तवस्तूनि जज्ञिरे ।
Summary
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For King Nala, who was about to depart, the group of young women itself became the collection of all auspicious objects needed for a journey. Their shining fingernails served as mirrors, their faces as lotuses, their smiles as flowers, their speech as honey, and their hands as tender sprouts.
पदच्छेदः
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| लसत् | लसत् (√लस्) | shining |
| नख | नख | nails |
| आदर्श | आदर्श | as mirrors |
| मुखाम्बुज | मुख–अम्बुज | lotus-faces |
| स्मित | स्मित | smiles |
| प्रसून | प्रसून | as flowers |
| वाणी | वाणी | speech |
| मधु | मधु | as honey |
| पाणिपल्लवम् | पाणि–पल्लव | sprout-like hands |
| यियासतः | यियासत् (√या+सन्+शतृ, ६.१) | of him who was desirous of going |
| तस्य | तद् (६.१) | of that |
| नृपस्य | नृप (६.१) | king |
| जज्ञिरे | जज्ञिरे (√जन् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | became |
| प्रशस्तवस्तूनि | प्रशस्त–वस्तु (१.३) | auspicious objects |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| एव | एव | itself |
| यौवतम् | यौवत (१.१) | the group of young women |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ल | स | न्न | खा | द | र्श | मु | खा | म्बु | ज | स्मि | त |
| प्र | सू | न | वा | णी | म | धु | पा | णि | प | ल्ल | वम् |
| यि | या | स | त | स्त | स्य | नृ | प | स्य | ज | ज्ञि | रे |
| प्र | श | स्त | व | स्तू | नि | त | दे | व | यौ | व | तम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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