सखीं नलं दर्शयमानयाङ्कतो
जवादुदस्तस्य करस्य कङ्कणे ।
विषज्य हारैस्त्रुटितैरतर्कितैः
कृतं कयापि क्षणलाजमोक्षणम् ॥
सखीं नलं दर्शयमानयाङ्कतो
जवादुदस्तस्य करस्य कङ्कणे ।
विषज्य हारैस्त्रुटितैरतर्कितैः
कृतं कयापि क्षणलाजमोक्षणम् ॥
जवादुदस्तस्य करस्य कङ्कणे ।
विषज्य हारैस्त्रुटितैरतर्कितैः
कृतं कयापि क्षणलाजमोक्षणम् ॥
अन्वयः
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नलं दर्शयमानया कया अपि अङ्कतः जवात् उदस्तस्य करस्य कङ्कणे अतर्कितैः त्रुटितैः हारैः विषज्य क्षणलाजमोक्षणं कृतम् ।
Summary
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As a certain woman quickly raised her hand to point out Nala to her friend, her pearl necklaces unexpectedly broke. The pearls, getting caught on her bracelet, scattered, creating the auspicious, albeit accidental, ritual of showering fried grains for a moment.
पदच्छेदः
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| सखीम् | सखी (२.१) | to her friend |
| नलम् | नल (२.१) | Nala |
| दर्शयमानया | दर्शयमान (√दृश्+णिच्+शानच्, ३.१) | by her who was showing |
| अङ्कतः | अङ्कतः | from her side |
| जवात् | जव (५.१) | with speed |
| उदस्तस्य | उदस्त (उद्√अस्+क्त, ६.१) | of the raised |
| करस्य | कर (६.१) | hand |
| कङ्कणे | कङ्कण (७.१) | on the bracelet |
| विषज्य | विषज्य (वि√सञ्ज्+ल्यप्) | having become entangled |
| हारैः | हार (३.३) | by the necklaces |
| त्रुटितैः | त्रुटित (√त्रुट्+क्त, ३.३) | broken |
| अतर्कितैः | अतर्कित (√तर्कि+क्त, ३.३) | unexpectedly |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | was done |
| कया | किम् (३.१) | by some woman |
| अपि | अपि | also |
| क्षणलाजमोक्षणम् | क्षण–लाज–मोक्षण (१.१) | a momentary scattering of fried grains |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | खीं | न | लं | द | र्श | य | मा | न | या | ङ्क | तो |
| ज | वा | दु | द | स्त | स्य | क | र | स्य | क | ङ्क | णे |
| वि | ष | ज्य | हा | रै | स्त्रु | टि | तै | र | त | र्कि | तैः |
| कृ | तं | क | या | पि | क्ष | ण | ला | ज | मो | क्ष | णम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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