सृजन्तु पाणिग्रहमङ्गलोचिता
मृगीदृशः स्त्रीसमयस्पृशः क्रियाः ।
श्रृतिस्मृतीनां तु वयं विदध्महे
विधीनिति स्माह च निर्ययौ च सः ॥
सृजन्तु पाणिग्रहमङ्गलोचिता
मृगीदृशः स्त्रीसमयस्पृशः क्रियाः ।
श्रृतिस्मृतीनां तु वयं विदध्महे
विधीनिति स्माह च निर्ययौ च सः ॥
मृगीदृशः स्त्रीसमयस्पृशः क्रियाः ।
श्रृतिस्मृतीनां तु वयं विदध्महे
विधीनिति स्माह च निर्ययौ च सः ॥
अन्वयः
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मृगीदृशः पाणिग्रहमङ्गलोचिताः स्त्रीसमयस्पृशः क्रियाः सृजन्तु। वयं तु श्रुतिस्मृतीनां विधीन् विदध्महे। इति सः आह स्म च, निर्ययौ च।
Summary
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'Let the deer-eyed women perform the activities suitable for the auspicious wedding, in accordance with their customs. We men, however, shall perform the rites prescribed by the scriptures.' Saying this, he (King Bhima) departed.
पदच्छेदः
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| सृजन्तु | सृजन्तु (√सृज् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | Let them perform |
| पाणिग्रहमङ्गलोचिताः | पाणि–ग्रह–मङ्गल–उचित (१.३) | suitable for the auspicious wedding ceremony |
| मृगीदृशः | मृगी–दृश् (१.३) | the deer-eyed women |
| स्त्रीसमयस्पृशः | स्त्री–समय–स्पृश् (१.३) | touching upon women's customs |
| क्रियाः | क्रिया (१.३) | the activities |
| श्रुतिस्मृतीनां | श्रुतिस्मृति (६.३) | of the Shrutis and Smritis |
| तु | तु | but |
| वयं | अस्मद् (१.३) | we |
| विदध्महे | विदध्महे (वि√धा कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. बहु.) | shall perform |
| विधीन् | विधि (२.३) | the rites |
| इति | इति | thus |
| स्म | स्म | (past tense marker) |
| आह | आह (√अह् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | said |
| च | च | and |
| निर्ययौ | निर्ययौ (निर्√या कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | departed |
| च | च | and |
| सः | तद् (१.१) | he |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सृ | ज | न्तु | पा | णि | ग्र | ह | म | ङ्ग | लो | चि | ता |
| मृ | गी | दृ | शः | स्त्री | स | म | य | स्पृ | शः | क्रि | याः |
| श्रृ | ति | स्मृ | ती | नां | तु | व | यं | वि | द | ध्म | हे |
| वि | धी | नि | ति | स्मा | ह | च | नि | र्य | यौ | च | सः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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