कपोलपालीजनिजानुबिम्बयोः
समागमात्कुण्डलमण्डलद्वयी ।
नलस्य तत्कालमवाप चित्तभूः
अथ स्फुरच्चक्रचतुष्कचारुताम् ॥
कपोलपालीजनिजानुबिम्बयोः
समागमात्कुण्डलमण्डलद्वयी ।
नलस्य तत्कालमवाप चित्तभूः
अथ स्फुरच्चक्रचतुष्कचारुताम् ॥
समागमात्कुण्डलमण्डलद्वयी ।
नलस्य तत्कालमवाप चित्तभूः
अथ स्फुरच्चक्रचतुष्कचारुताम् ॥
अन्वयः
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अथ नलस्य कपोलपालीजनिजानुबिम्बयोः समागमात् कुण्डलमण्डलद्वयी तत्कालम् चित्तभूः स्फुरत् चक्रचतुष्कचारुताम् अवाप ।
Summary
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Then, as Damayanti sat on Nala's lap, the reflections of her knees appeared on his cheeks. Due to the union of these two reflections with his two earrings, the pair of earring-orbs acquired the beauty of a glittering set of four wheels, resembling the chariot of Kamadeva.
पदच्छेदः
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| कपोलपाली | कपोल–पाली | on the surface of the cheeks |
| जनि | जनि (√जन्) | born |
| जानुबिम्बयोः | जानु–बिम्ब (६.२) | of the two reflections of the knees |
| समागमात् | समागमात् (५.१) | from the union |
| कुण्डलमण्डलद्वयी | कुण्डल–मण्डल–द्वयी (१.१) | the pair of earring-orbs |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| तत्कालम् | तत्कालम् | at that time |
| अवाप | अवाप (अव√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | obtained |
| चित्तभूः | चित्तभू (१.१) | Kamadeva |
| अथ | अथ | then |
| स्फुरत् | स्फुरत् (√स्फुर्) | glittering |
| चक्रचतुष्क | चक्र–चतुष्क | a set of four wheels |
| चारुताम् | चारुता (२.१) | the beauty of |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | पो | ल | पा | ली | ज | नि | जा | नु | बि | म्ब | योः |
| स | मा | ग | मा | त्कु | ण्ड | ल | म | ण्ड | ल | द्व | यी |
| न | ल | स्य | त | त्का | ल | म | वा | प | चि | त्त | भूः |
| अ | थ | स्फु | र | च्च | क्र | च | तु | ष्क | चा | रु | ताम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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