न यावदग्निभ्रममेत्युदूढतां
नलस्य भैमीति हरेर्दुराशया ।
स बिन्दुरिन्दुः प्रहितः किमस्य सा
न वेति भाले पठितुं लिपीमिव ॥
न यावदग्निभ्रममेत्युदूढतां
नलस्य भैमीति हरेर्दुराशया ।
स बिन्दुरिन्दुः प्रहितः किमस्य सा
न वेति भाले पठितुं लिपीमिव ॥
नलस्य भैमीति हरेर्दुराशया ।
स बिन्दुरिन्दुः प्रहितः किमस्य सा
न वेति भाले पठितुं लिपीमिव ॥
अन्वयः
AI
हरेः दुराशया 'नलस्य भैमी' इति अग्निभ्रमं न यावत् एति, (तावत्) अस्य भाले 'सा (भैमी अस्ति) न वा' इति लिपीम् पठितुम् इव सः बिन्दुः इन्दुः प्रहितः किम्?
Summary
AI
Before Indra's wicked hope that Damayanti would not be married to Nala was dispelled, was that moon-like decorative dot sent by him? It seemed as if it were sent to read the script of fate on Nala's forehead to ascertain, 'Is she his or not?'
पदच्छेदः
AI
| न | न | not |
| यावत् | यावत् | as long as |
| अग्निभ्रमम् | अग्नि–भ्रम (२.१) | the delusion of fire |
| एति | एति (√इ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | attains |
| उदूढताम् | उदूढ (उद्√वह्+क्त)–ता (२.१) | the state of being married |
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| भैमी | भैमी (१.१) | Damayanti |
| इति | इति | thus |
| हरेः | हरि (६.१) | of Indra |
| दुराशया | दुराशय (३.१) | with evil intention |
| सः | तद् (१.१) | that |
| बिन्दुः | बिन्दु (१.१) | dot |
| इन्दुः | इन्दु (१.१) | moon |
| प्रहितः | प्रहित (प्र√धा+क्त, १.१) | sent |
| किम् | किम् | was it? |
| अस्य | इदम् (६.१) | of this one (Nala) |
| सा | तद् (१.१) | she |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
| इति | इति | thus |
| भाले | भाल (७.१) | on the forehead |
| पठितुम् | पठितुम् (√पठ्+तुमुन्) | to read |
| लिपीम् | लिपि (२.१) | the script |
| इव | इव | as if |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | या | व | द | ग्नि | भ्र | म | मे | त्यु | दू | ढ | तां |
| न | ल | स्य | भै | मी | ति | ह | रे | र्दु | रा | श | या |
| स | बि | न्दु | रि | न्दुः | प्र | हि | तः | कि | म | स्य | सा |
| न | वे | ति | भा | ले | प | ठि | तुं | लि | पी | मि | व |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.