नलस्य भाले मणिवीरपट्टिका-
निभेन लग्नः परिधिर्विधोर्बभौ ।
तदा शशाङ्काधिकरूपतां गते
तदानने मातुमशक्नुवन्निव ॥
नलस्य भाले मणिवीरपट्टिका-
निभेन लग्नः परिधिर्विधोर्बभौ ।
तदा शशाङ्काधिकरूपतां गते
तदानने मातुमशक्नुवन्निव ॥
निभेन लग्नः परिधिर्विधोर्बभौ ।
तदा शशाङ्काधिकरूपतां गते
तदानने मातुमशक्नुवन्निव ॥
अन्वयः
AI
तदा तत्-आनने शशाङ्क-अधिक-रूपताम् गते सति, तस्मिन् मातुम् अशक्नुवन् इव विधोः परिधिः, मणि-वीर-पट्टिका-निभेन नलस्य भाले लग्नः बभौ।
Summary
AI
When Nala's face attained a beauty greater than the moon's, the moon's halo, as if unable to fit on his face anymore, appeared on Nala's forehead under the pretext of a jeweled heroic headband.
पदच्छेदः
AI
| नलस्य | नल (६.१) | of Nala |
| भाले | भाल (७.१) | on the forehead |
| मणि-वीर-पट्टिका-निभेन | मणिवीरपट्टिकानिभ (३.१) | under the pretext of a jeweled heroic headband |
| लग्नः | लग्न (√लग्+क्त, १.१) | attached |
| परिधिः | परिधि (१.१) | a halo |
| विधोः | विधु (६.१) | of the moon |
| बभौ | बभौ (√भा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| तदा | तदा | then |
| शशाङ्क-अधिक-रूपताम् | शशाङ्काधिकरूपता (२.१) | the state of having more beauty than the moon |
| गते | गत (√गम्+क्त, ७.१) | having attained |
| तत्-आनने | तदानन (७.१) | on his face |
| मातुम् | मातुम् (√मा+तुमुन्) | to fit into |
| अशक्नुवन् | अशक्नुवत् (√शक्+शतृ, १.१) | being unable |
| इव | इव | as if |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ल | स्य | भा | ले | म | णि | वी | र | प | ट्टि | का |
| नि | भे | न | ल | ग्नः | प | रि | धि | र्वि | धो | र्ब | भौ |
| त | दा | श | शा | ङ्का | धि | क | रू | प | तां | ग | ते |
| त | दा | न | ने | मा | तु | म | श | क्नु | व | न्नि | व |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.