उपास्यमानाविव शिक्षितुं ततो
मृदुत्वमप्रौढमृणालनालया ।
विरेजतुर्माङ्गलिकेन संगतौ
भुजौ सुदत्या वलयेन कम्बुनः ॥
उपास्यमानाविव शिक्षितुं ततो
मृदुत्वमप्रौढमृणालनालया ।
विरेजतुर्माङ्गलिकेन संगतौ
भुजौ सुदत्या वलयेन कम्बुनः ॥
मृदुत्वमप्रौढमृणालनालया ।
विरेजतुर्माङ्गलिकेन संगतौ
भुजौ सुदत्या वलयेन कम्बुनः ॥
अन्वयः
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सुदत्याः भुजौ माङ्गलिकेन कम्बुनः वलयेन संगतौ, ततः अप्रौढ-मृणाल-नालया मृदुत्वम् शिक्षितुम् उपास्यमानौ इव विरेजतुः।
Summary
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The two arms of the beautiful-toothed Damayanti, adorned with an auspicious bracelet made of conch-shell, shone as if they were being attended upon by a tender lotus-stalk in order to learn softness from it.
पदच्छेदः
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| उपास्यमानौ | उपास्यमान (उप√आस्+णिच्+शानच्, १.२) | being served |
| इव | इव | as if |
| शिक्षितुम् | शिक्षितुम् (√शिक्ष्+तुमुन्) | to learn |
| ततः | ततः | from it |
| मृदुत्वम् | मृदुत्व (२.१) | softness |
| अप्रौढ-मृणाल-नालया | अप्रौढमृणालनाल (३.१) | by the tender lotus-stalk |
| विरेजतुः | विरेजतुः (वि√राज् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. द्वि.) | shone |
| माङ्गलिकेन | माङ्गलिक (३.१) | with the auspicious |
| संगतौ | संगत (सम्√गम्+क्त, १.२) | joined |
| भुजौ | भुज (१.२) | the two arms |
| सुदत्याः | सुदती (६.१) | of the one with beautiful teeth |
| वलयेन | वलय (३.१) | with the bracelet |
| कम्बुनः | कम्बु (६.१) | of the conch shell |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | पा | स्य | मा | ना | वि | व | शि | क्षि | तुं | त | तो |
| मृ | दु | त्व | म | प्रौ | ढ | मृ | णा | ल | ना | ल | या |
| वि | रे | ज | तु | र्मा | ङ्ग | लि | के | न | सं | ग | तौ |
| भु | जौ | सु | द | त्या | व | ल | ये | न | क | म्बु | नः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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