तदक्षितत्कालतुलागसा नखं
निखाय कृष्णस्य मृगस्य चक्षुषी ।
विधिर्यदुद्धर्तुमियेष तत्तयो-
रदूरवर्तिक्षतता स्म शंसति ॥
तदक्षितत्कालतुलागसा नखं
निखाय कृष्णस्य मृगस्य चक्षुषी ।
विधिर्यदुद्धर्तुमियेष तत्तयो-
रदूरवर्तिक्षतता स्म शंसति ॥
निखाय कृष्णस्य मृगस्य चक्षुषी ।
विधिर्यदुद्धर्तुमियेष तत्तयो-
रदूरवर्तिक्षतता स्म शंसति ॥
अन्वयः
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विधिः कृष्णस्य मृगस्य चक्षुषी तत्-अक्षि-तत्-काल-तुला-अगसा (हेतुना) नखं निखाय यत् उद्धर्तुम् इयेष, तत् तयोः अदूर-वर्ति-क्षतता स्म शंसति।
Summary
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The slight redness near the black deer's eyes suggests that Brahma, the creator, once wished to pluck them out after digging his nail into them, as a punishment for the sin of daring to be a match for Damayanti's eyes.
पदच्छेदः
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| तत् | तद् | her |
| अक्षि | अक्षि | eye |
| तत् | तद् | that |
| काल | काल | time |
| तुला | तुला | comparison |
| अगसा | अगस् (३.१) | by the sin of |
| नखम् | नख (२.१) | nail |
| निखाय | निखाय (नि√खन्+ल्यप्) | having dug in |
| कृष्णस्य | कृष्ण (६.१) | of the black |
| मृगस्य | मृग (६.१) | deer |
| चक्षुषी | चक्षुस् (२.२) | the two eyes |
| विधिः | विधि (१.१) | Brahma |
| यत् | यत् | that |
| उद्धर्तुम् | उद्धर्तुम् (उद्√हृ+तुमुन्) | to pluck out |
| इयेष | इयेष (√इष् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wished |
| तत् | तद् (१.१) | that fact |
| तयोः | तद् (६.२) | of those two |
| अदूर | अदूर | nearby |
| वर्ति | वर्तिन् | existing |
| क्षतता | क्षतता (१.१) | the state of having a wound |
| स्म | स्म | indeed |
| शंसति | शंसति (√शंस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | indicates |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | क्षि | त | त्का | ल | तु | ला | ग | सा | न | खं |
| नि | खा | य | कृ | ष्ण | स्य | मृ | ग | स्य | च | क्षु | षी |
| वि | धि | र्य | दु | द्ध | र्तु | मि | ये | ष | त | त्त | यो |
| र | दू | र | व | र्ति | क्ष | त | ता | स्म | शं | स | ति |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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