विरेजिरे तच्चिकुरोत्कराः किराः
क्षाणं गलन्निर्मलवारिविप्रुषाम् ।
तमःसुहृच्चामरनिर्जयार्जिताः
सिता वमन्तः खलु कीर्तिमुक्तिकाः ॥
विरेजिरे तच्चिकुरोत्कराः किराः
क्षाणं गलन्निर्मलवारिविप्रुषाम् ।
तमःसुहृच्चामरनिर्जयार्जिताः
सिता वमन्तः खलु कीर्तिमुक्तिकाः ॥
क्षाणं गलन्निर्मलवारिविप्रुषाम् ।
तमःसुहृच्चामरनिर्जयार्जिताः
सिता वमन्तः खलु कीर्तिमुक्तिकाः ॥
अन्वयः
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तमः-सुहृत्-चामर-निर्जय-अर्जिताः सिताः कीर्ति-मुक्तिकाः वमन्तः खलु (इव), क्षणं गलत्-निर्मल-वारि-विप्रुषः किरन्तः तत्-चिकुर-उत्कराः विरेजिरे।
Summary
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Her tresses, scattering drops of pure water, shone brightly. They seemed to be emitting white pearls of fame, earned by conquering the chauri-like darkness, their friend.
पदच्छेदः
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| विरेजिरे | विरेजिरे (वि√राज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | shone |
| तत् | तद् | her |
| चिकुर | चिकुर | hair |
| उत्कराः | उत्कर (१.३) | masses of |
| किराः | किर (१.३) | scattering |
| क्षणम् | क्षणम् | for a moment |
| गलत् | गलत् (√गल्+शतृ) | falling |
| निर्मल | निर्मल | pure |
| वारि | वारि | water |
| विप्रुषाम् | विप्रुष् (६.३) | of drops |
| तमः | तमस् | darkness |
| सुहृत् | सुहृद् | friend |
| चामर | चामर | chauri (yak-tail fan) |
| निर्जय | निर्जय | by conquering |
| अर्जिताः | अर्जित (√अर्ज्+क्त, १.३) | earned |
| सिताः | सित (१.३) | white |
| वमन्तः | वमत् (√वम्+शतृ, १.३) | emitting |
| खलु | खलु | indeed |
| कीर्ति | कीर्ति | fame |
| मुक्तिकाः | मुक्तिका (२.३) | pearls of |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | रे | जि | रे | त | च्चि | कु | रो | त्क | राः | कि | राः |
| क्षा | णं | ग | ल | न्नि | र्म | ल | वा | रि | वि | प्रु | षाम् |
| त | मः | सु | हृ | च्चा | म | र | नि | र्ज | या | र्जि | ताः |
| सि | ता | व | म | न्तः | ख | लु | की | र्ति | मु | क्ति | काः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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