तदा निसस्वानतमां घनं घनं
ननाद तस्मिन्नितरां ततं ततम् ।
अवापुरुच्चैः सुषिराणि राणिताम्
अमानमानद्धमियत्तयाध्वनीत् ॥
तदा निसस्वानतमां घनं घनं
ननाद तस्मिन्नितरां ततं ततम् ।
अवापुरुच्चैः सुषिराणि राणिताम्
अमानमानद्धमियत्तयाध्वनीत् ॥
ननाद तस्मिन्नितरां ततं ततम् ।
अवापुरुच्चैः सुषिराणि राणिताम्
अमानमानद्धमियत्तयाध्वनीत् ॥
अन्वयः
AI
तदा तस्मिन् घनं (वाद्यं) घनम् अतमां निसस्वान। ततं (वाद्यं) नितरां ततं ननाद। सुषिराणि (वाद्यानि) उच्चैः राणितां अवापुः। आनद्धम् (वाद्यम्) इयत्तया अमानम् अध्वनीत्।
Summary
AI
Then the festive music began: solid instruments (cymbals) sounded quickly and repeatedly; stringed instruments resounded continuously and intensely; wind instruments reached a high pitch; and percussion instruments sounded with immeasurable volume.
पदच्छेदः
AI
| तदा | तदा | Then |
| निसस्वान | निसस्वान (नि√स्वन् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sounded |
| अतमाम् | अतमाम् | quickly |
| घनं | घन (१.१) | the solid instrument (cymbals) |
| घनम् | घनम् | repeatedly |
| ननाद | ननाद (√नद् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | resounded |
| तस्मिन् | तद् (७.१) | in that (city) |
| नितराम् | नितराम् | intensely |
| ततं | तत (१.१) | the stringed instrument |
| ततम् | ततम् | continuously |
| अवापुः | अवापुः (अव√आप् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | attained |
| उच्चैः | उच्चैः | highly |
| सुषिराणि | सुषिर (१.३) | the wind instruments |
| राणिताम् | राणिता (२.१) | a ringing sound |
| अमानम् | अमानम् | immeasurably |
| आनद्धम् | आनद्ध (१.१) | the percussion instrument |
| इयत्तया | इयत्ता (३.१) | by its measure |
| अध्वनीत् | अध्वनीत् (√ध्वन् कर्तरि लुङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | sounded |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दा | नि | स | स्वा | न | त | मां | घ | नं | घ | नं |
| न | ना | द | त | स्मि | न्नि | त | रां | त | तं | त | तम् |
| अ | वा | पु | रु | च्चैः | सु | षि | रा | णि | रा | णि | ता |
| म | मा | न | मा | न | द्ध | मि | य | त्त | या | ध्व | नीत् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.